उपचुनाव के बहाने कहीं भाजपा का दारा के ब्रांडिंग की तैयारी तो नहीं !
@आनन्द कुमार…
मऊ। यह राजनीति है और इसके पैंतरे के अनगिनत किस्से और कहानियां हैं। आप जहां से इसे सोचने और समझने की कोशिश करेंगे, इसके नेता वहीं से कट मार कर दूसरी और नई चाल चलने की कोशिश करने लगेंगे।
वैसे भी देश में आगामी 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव का लोकतंत्र के इतिहास में अपनी अलग ही कहानी होगी। भाजपा अपने सहयोगी दलों के साथ किसी भी कीमत पर 2024 में कोई चूक नहीं करनी चाहती है। इसलिए वह अपने पार्टी के कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर कोई भी ऐसे कदम उठाने से परहेज नहीं कर रही है, जो वह भाजपा के लिए ज़रूरी समझ रही है। सपा विधायक दारा सिंह चौहान के घोसी विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफे के बाद भाजपा में वापसी और पुनः इसी सीट पर दारा सिंह चौहान को उपचुनाव के लिए प्रत्याशी बनाया जाना भले ही बहुतेरों को रास नहीं आ रहा है लेकिन भाजपा इससे एक तीर से कई निशाने लगाने की फिराक में है। इसे राजनीति की समझ रखने वालों को बड़ी ही बारीकी से समझाना पड़ेगा क्योंकि भाजपा यूं ही कोई ऐसी चाल नहीं चलती!
वैसे तो भाजपा किसी भी कीमत पर उपचुनाव में घोसी सीट पर दारा को विजय दिलाने के लिए जनता जनार्दन की अदालत में हर एक वह कोशिश कर रही है जिससे जनता भाजपा के इस पहल को 2024 को लेकर देखें। वहीं विपक्षी दल के रूप में सपा से पूर्व विधायक सुधाकर सिंह का टिकट फ़ाइनल होते ही विपक्षी अपनी जीत के लिए आश्वस्त हैं तो बसपा व कांग्रेस अपने प्रत्याशी को लेकर मौन हैं। इस लिए बार बार उपचुनाव का दंश झेल रही घोसी की जनता का अपने नए जनप्रतिनिधी के प्रति नजरिया क्या होगा यह तो जनता ही जाने! लेकिन घोसी में राजनैतिक संग्राम बहुत ही ज़बरदस्त है।
तभी तो भारतीय जनता पार्टी ने दारा सिंह चौहान के भाजपा में वापसी के बाद जहां उन्हें प्रत्याशी बनाए जाने की घोषणा की वहीं 16 अगस्त को उनके नामांकन के लिए कोपागंज के बापू इंटर कॉलेज के मैदान में एक सभा कर उत्तर प्रदेश सरकार व भाजपा सहित सहयोगी दलों के दिग्गजों को उतारकर यह संदेश देना चाहती है कि दल बदल में भले ही दारा की अपनी मर्जी है लेकिन दारा सिंह चौहान के साथ भाजपा पूरे मुस्तैदी के साथ खड़ी है और दारा भाजपा के लिए बहुत जरूरी भी हैं ।
इसलिए 16 अगस्त को मऊ जनपद के घोसी विधानसभा के कोपागंज के बापू इंटर कॉलेज के मैदान में दारा के नामांकन में उत्तर प्रदेश सरकार के डिप्टी सीएम और पूर्व में बहुजन समाज पार्टी उनके साथी रह चुके बृजेश पाठक, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर, मत्स्य मंत्री संजय निषाद, अपना दल के आशीष पटेल के साथ-साथ कैबिनेट मंत्री एके शर्मा, राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार गिरीश यादव, राज्यमंत्री दानिश आजाद, कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर सहित आजमगढ़ के सांसद दिनेश लाल यादव निरहुआ के अलावा कई अन्य के आने की संभावना है। कई नेताओं के प्रोटोकॉल आ चुके हैं तो कई नेताओं के आने की बात स्वयं दारा कर रहे हैं!
जहां दारा सिंह चौहान के भाजपा में शामिल होने पर पार्टी के ही कुछ कार्यकर्ता दबी जुबान विरोध कर रहे हैं, वहीं नामांकन के पूर्व भाजपा की इस बड़ी तैयारी से यह संदेश साफ है कि भाजपा घोसी का उपचुनाव लड़ने के लिए कमर कस चुकी है और वे दारा सिंह चौहान के लिए हर कदम पर तैयार है। वहीं सूत्रों की बात मान कर अगर भाजपा के इस तैयारी के पीछे की बात करें तो भारतीय जनता पार्टी घोसी से दारा सिंह चौहान को उपचुनाव लड़ा कर यह संदेश देना चाहती है की दारा सिंह चौहान, चौहान समाज के सबसे बड़े नेता है। क्योंकि पिछली बार जब वे बसपा छोड़ भाजपा में शामिल हुए थे तो पार्टी ने उन्हें भाजपा पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना कर बड़ा सम्मान दिया था। साथ ही 2017 में मधुबन विधानसभा से चुनाव लड़ाकर पार्टी ने उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाई, लेकिन दारा इस सम्मान को 2022 के विधानसभा चुनाव के समय तक संभाल न सके। खैर भाजपा को जरुरत दारा की थी, कि दारा को जरुरत भाजपा की अगर इस पर गौर किया जाए तो दोनों वर्तमान की राजनीति के एक दूसरे के पूरक बने हुए हैं। लेकिन कौन किसका राजनैतिक महत्वाकांक्षा की कितना पूर्ति कर पाता है यह आने वाला वक़्त बताएगा ।
दारा सिंह चौहान के प्रति भाजपा के इस दरियादिली के पहलू को अगर ऐसे समझे तो मधुबन के विधायक रामविलास चौहान अपनी राजनैतिक छवि को अपने पिता पूर्व कैबिनेट मंत्री व वर्तमान राज्यपाल फागू चौहान की बनाई राजनीतिक पकड़ इतना विस्तार नहीं दे पाए हैं! तभी तो भाजपा को दारा सिंह चौहान की ज़रूरत ज़्यादा महसूस हुई और वे पार्टी के कार्यकर्ताओं की भावनाओं को नज़रअंदाज़ करके तथा 2024 की ज़रूरत को ध्यान में रखकर श्री चौहान के प्रति अपनी हमदर्दी दिखाकर दिग्गजों की पूरी चाल ही चल दी है।
इसके अलावा पार्टी के अन्य चौहान नेताओं पर भाजपा को विश्वास नहीं हो पा रहा है कि वे पार्टी के लिए बड़े स्तर पर नेता साबित होंगे। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी को दारा सिंह चौहान की पार्टी में कमी बहुत खल रही थी और पूर्वांचल के अधिकांश सीटों पर चौहान समाज के वोटों पर नजर रखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने पार्टी छोड़कर समाजवादी पार्टी में गए दारा सिंह चौहान पर नजर लगाई, बात जब अंदरखाने सब तय हो गई तो दारा सिंह चौहान ने समाजवादी पार्टी से इस्तीफा के साथ-साथ विधानसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा देकर बीजेपी का दामन थाम लिया। बड़े नेताओं के निर्देश पर दारा का मऊ में भाजपा के पार्टी कार्यालय में स्वागत कराने के बाद, भाजपा ने उपचुनाव में प्रत्याशी बनाए जाने की घोषणा की और उसके बाद नामांकन के ठीक पहले भाजपा और सहयोगी दलों के नेताओं का जमावड़ा कर यह संदेश देने की कोशिश भी कर दी की दारा उनके लिए महत्वपूर्ण हैं। भाजपा दारा के सहारे 2024 के लोकसभा चुनाव वैतरणी में एक मजबूत कड़ी बनाने की कोशिश में है। भाजपा अगर घोसी का उपचुनाव जीत गई तो यह तो उसके लिए बल्ले-बल्ले है अगर हार गई तो उसके पास खोने को कुछ नहीं है क्योंकि यह सीट उसकी थी ही नहीं। हां यह जरूर है कि 2009 के लोकसभा में बसपा के संसदीय दल के नेता रहे व 2022 में अखिलेश यादव के हाथों सिर पर लाल टोपी पहनने वाले दारा सिंह चौहान को भाजपा में शामिल कराकर भाजपा 2024 की लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा उम्मीदवारों के खिलाफ बिगुल फूंकवाएगी। खैर 2024 में क्या होगा यह तो बाद की बात है लेकिन 2023 दारा सिंह चौहान, भाजपा, सुभासपा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है ।

