चर्चा में

राजनैतिक दलों को तीसरे विकल्प का प्रयोग बंद करना होगा, नहीं तो विकास दूबे पैदा होते रहेंगे

( आनन्द कुमार )

08 पुलिस कर्मियों के हत्यारे विकास दूबे को अब राजनैतिक दल से जोड़ा जा रहा है बिल्कुल वह पहले बसपा अब सपा या किसी अन्य दल से जुड़ा होगा। लेकिन क्या यह दोष विपक्षी दलों में ही है या ऐसे लोग सत्तारूढ़ दल से लेकर अन्य दलों में भी हैं, बिल्कुल हैं। कोई दल इससे अछूता नहीं है। इसमें गलती जनता की भी है कि हम इन्हें चुनते हैं लेकिन जनता से पहले बड़ी गलती उन सभी राजनैतिक दल के मुखिया की भी है जो अपने जनप्रतिनिधियों की गिनती बढ़ाने के लिए जाति-धर्म के बाद अपराधी टाइप के लोगों को टिकट देने के लिए तीसरे विकल्प का प्रयोग करते हैं।
आज भाजपा शासन काल में यह घटना हुयी है तो गैर भाजपा के लोग चिल्लाएंगे, कल सपा, बसपा, कांग्रेस या अन्य किसी पार्टी की सरकार में होगा तब बाकी विपक्षी चिल्लाएंगे।
लेकिन दु:ख इस बात कि है कि कोई दल यह कहने की हैसियत में नहीं है कि हम ऐसे लोगों से परहेज करेगें। मानसिकता बदलना होगा तब ऐसी घटनाएं अपने आप रूकेगी।
राजनैतिक दलों को अपने फाएदे के लिए तीसरे विकल्प का प्रयोग बंद करना होगा तब जाकर कोई विकास दूबे पैदा नहीं होगा। हां एक बात और यह तो वह हत्या है जिसकी गिनती आप 01 से 08 तक कर ले रहे हैं लेकिन सोचिए वह गिनती कितनी होगी जो विकास दूबे और उनके जैसे ना जाने कितने हर शहर में अपने घटना को अंजाम देते हैं।
ऐसी घटनाओं पर वर्तमान सरकार तो सोचे ही, वह भी सोचे जो सरकार बनना चाहते हैं। वर्ना विकास दूबे पैदा होते रहेंगे और हम आप गिनती गिनते रह जाएंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *