चर्चा में

पंजाब के सीएम भगवंत मान के इस फैसले का स्वागत तो बनता है

@ आनन्द कुमार…

चंडीगढ़। बिल्कुल जब किसी सरकार द्वारा अच्छा काम हो तो उस काम की तारीफ होनी चाहिए, उस काम का स्वागत होना चाहिए। वर्तमान में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने ही सरकार के कैबिनेट मंत्री को बर्खास्त कर न सिर्फ एक नजीर पेश किया है। बल्कि उन्होंने आरोप का पुख्ता सबूत होने के कारण उनकी तत्काल गिरफ्तारी का आदेश देकर यह संदेश देने की कोशिश किया है कि हम कुछ अलग करने आए हैं हम कुछ अलग करेंगे। हम औरों की तरह नहीं है और ना ही बनेंगे। मुख्यमंत्री मान का यह कड़ा फैसला स्वागत योग्य है, अभिनन्दन योग्य है।

राजनीति की चासनी में सत्ता और सत्ता के सुख में डूबे राजनेताओं और उनके मुखिया के बीच यह फैसला बड़ी ताकत व मायने वाली है। इस फैसले को भले ही पंजाब के व्यक्तिगत एक राज्य का माना जाए लेकिन यह देश के हर राजनैतिक गलियारों में हर सदन में अपना गूंज छोड़ चुका है। भगवंत मान के इस फैसले से दिल्ली सरकार के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल व कैबिनेट मंत्री मनीष सिसोदिया सहित आम आदमी पार्टी के हजारों व लाखों समर्थकों, पदाधिकारियों का भी मस्तिष्क ऊंचा हुआ है इस बात को कतई नकारा नहीं जा सकता। इन फैसलों से आप को आगामी चुनावों में फाएदा मिलने की संभावना बलवती होती है इस बात भी इंकार नहीं किया जा सकता।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपनी ही पार्टी के कैबिनेट मंत्री को उस मामले में बर्खास्त और गिरफ्तार करवाया जिस भ्रष्टाचार का विरोध करके आम आदमी पार्टी का जन्म हुआ था और दिल्ली से लेकर पंजाब तक सरकार बनाने में कामयाबी मिली। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने सिर्फ स्वास्थ्य मंत्री विजय सिंगला को कैबिनेट से बर्खास्त करने के बाद पुख्ता सबूत होने के मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो द्वारा गिरफ्तार नहीं कराया, बल्कि उनके ओएसडी प्रदीप कुमार को भी गिरफ्तार कराकर अधिकारियों को भी संदेश दे डाला की किसी की खैर नहीं है। पहली बार पंजाब में आप की बनी सरकार द्वारा यह फैसला लेना केवल पंजाब राज्य के लिए ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए वर्तमान की राजनीति में नज़ीर साबित हो रही है। इसके पूर्व वर्ष 2015 में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने भ्रष्टाचार के एक मामले में अपने ही एक मंत्री को बर्खास्त कर दिया था। विजय सिंगला ने मानसा से प्रसिद्ध गायक और कांग्रेस उम्मीदवार सिद्धू मूसेवाला को लगभग 60 हजार से अधिक वोटों से हराया था।

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