चर्चा में

मेरे शहर में… बाबा जी अउर उनके पड़ेश्वर महराज……

@ संजय दुबे ( वरिष्ठ पत्रकार )

अपना शहर नायाब है। इससे किसी को कोई गुरेज़ नहीं है। आदतन, वईसे,होना भी नहीं चाहिए। फ़िर भी,अगर है भी तो,कोई बात नहीं। ‘लोकतंतर ‘ में विरोध होना ही चाहिए। इहे न एकरा खूबसूरती है?एकतरफा मामला,कहियों ठीक नहीं होता है। अइसा,वइसा मामला एटिंग -सेटिंग का हो या भोटिंग – सोटिंग का। विरोध,दिखना चाहिए।नहीं तो कइसा गणतंत्र? कैसी डेमोक्रेसी? कैसा चुनाव? अउर,कउन बाते का चुनाव? चुनाव मतलब,रेकार्ड के नया- पुरान के पुराण। ‘ढाकेल, तोपल सब खबरि के उपराय जाय। कुछु बाकिर ना रहें।’ जेतना विरोधी लोगन के जानकारी होखि प्रत्याशी लग्गेँ, ओतना ऊ, मज़बूती से चुनाव लड़ी।
अब, आप लोगौ को पते है, अपना देश ऋषियों, मुनियों का है। बाबा लोगों का है। सिद्ध महात्माओं का है। केहू कउनो जंगल में बइठा है, केहू,कउनो पहाड़ के उचकी चोटी पे। कहीं कोई बीस फुट जमीन के भीतर रह रहा है तो केहू बीस बरस से बइठबे नहीं किया है। ई, सभी लोग पहुंचे हुए है।जिनकरा, सबका, भूत, भविष्य पता है? ऊ, ज़ब चाहें तब बता दें-‘ केकरा दिल में का बा।’ के, कब,का करी। सभे कुछ उनको पता है, बस! भक्ति भाव से जो गया उसको उचित मार्गदर्शन मिला। वइसहीं एगो बाबा है। मीडिया में रमें है। देश के बारे में बहुते जानते है। उत्तर से दक्खीन ले धाँगे हुए है।दुनिया जहान में जउन पेपर सबसे बेसी छपता, बिकता है, उहाँ के ऊ है। उनकरा पास एगो पड़ेशर महराज आये हुए है। सिद्ध आत्मा उनको, इ,बताते है। एतना सिद्ध कि कउनो काम का रिजल्ट काम शुरू होने के पहिलहीं उ बता देंगे। काम होगा कि नहीं। होगा तो कइसे होगा? केतना प्रतिशत सफल होगा अउर केतना असफल? अब आप लोग मानें या न मानें, बाबा जी के पड़ेशर महराज की चर्चा हिंदुस्ताने नहीं पड़ोसी देशों से लगाए योरप तक में है। उहाँ, अक्टूपस गुरु का खेला खतमे बूझिये, अब पड़ेशर महराज की जै -जै होनी तय है। काहेकि जउने ढंग से पड़ेशर महराज बाबा जी को नगर निकाय चुनाव के बारे में बताये है, हैरते की बात है। ईद पे ही केकरा कहाँ से टिकट मिलेगा? बाबा जी को इनसे पता चल चुका था। ताज्जुब कि बात है की पड़ेशर महराज बाबा जी को इलेक्शन रिजल्टवों बता चुके है। जेकरा शत प्रतिशत सत्य होने की आशंका है।जेतने दिव्य बाबा जी,उतनै,सिद्ध पुरुषों से उनके संबंध। बाबा जी से बड़ा कुरेद के पूछे – “गुरु! इनसे आपकी कबसे जान पहचान है? आज तक तो आप इनकी एको बार चर्चा नहीं किये, अचानके से इ कहां से उपरा गए? पहिले तो टाल गए….”छोड़िये गुरु! काहे एतना फेरे में पड़े है। बस, जान लीजिये कि जान पहचान है अउर का?” पर हमहूँ उनकरा पिंड नहीं छोड़े तब कहीं जा के बाबा जी , ब्राह्मण व्यक्ति न, नरम हुए, बताये कि- ‘ बाबा जी को ये उत्तराखंड की यात्रा में मिलें थे। घूमते हुए। इनसे कहें थें-” फ़िर मिलेंगे। ” बाबा जी भुला गये थे, पर पड़ेशर महराज को याद था। एक्सप्रेस वे पकड़ के इधर, न जानें कहां से एक दिन अचानके से उपरा गये अउर कह रहें है कि बाबा जी ! हम 11मई के बाद ही जायेंगे। ‘ तबसे यहीं है। पड़ेशर महराज, सिर्फ, बाबा जी से बात करते है। दूसरा अदमी अगर कुछु पूछता है तब महराज, बातें नहीं करते है।अउर कोई केतनो अपने को दिव्य पुरुष बताता हों उनसे बतिया भी नहीं पायेगा। काहें कि सिद्ध आत्मा से सिद्ध पुरुष ही बतिया सकते है। सांसारिक नहीं। अउर जेतना अपने को दिव्य पुरुष बताते फ़िर रहे है सभे सांसारिक झमेले के बखेड़े में मुड़ी से एड़ी तक धंसे है। वइसहीं जइसे मुखरा के गोराई धरावें वाली क्रीम से लगाए फाटल एड़ी के दरार भरें वाले लोशन तक। बाबा जी को 13 तारीख़ का रिजल्टवों पड़ेशर महराज बता दिए है। चुनाव आयोग के चलते ऊ बता नहीं रहें है पर हमकों पूरा विश्वास है टीवी चैनलों की तरह बाबा जी भी 11 तारीख़ को एग्जिट पोल की तरह पड़ेशर महराज की भविष्यवाणी बतायेंगे। बाबा जी अउर पड़ेशर महराज के संवाद देख आपको मुगले आज़म फिलिम याद आ जाएगी। देखिये! अपना मऊ, भरसक प्रयास में लगा हुआ है कि वो बाबा जी अउर पड़ेशर महराज के बातचीत का साक्षात्कार आपको पढ़ा,दिखा सकें। पर, अभी तक़ इसकी अनुमति नहीं मिली है। मामला विचारधीन है। मऊ की समझदार अवाम के जेहन में। जो कहियों से, कहीं से, केहूँ से कम दूरदर्शी नहीं है। उसकों पहलेँहि सब बूझा जाता है कि कवना ओर ओकरा फ़ायदा है? ऊ,ओनिये लरक जाता है। हाँ!एतना तय है,जेनिए,इ लरकेगा उहै,जीतेगा। अब देखना है कि जीत का रिजल्ट का आता है? बाबा जी के पड़ेशर महराज की भविष्यवाणी सच होता है कि नहीं।

(फुटनोट : कृपया पाठक इसके शीन, काफ़ पर न जाय। न ही तत्सम, तद्भव के फेर में पड़े। जिस तरह चुनाव में सारे वो सारे दाँव सरेआम लगाए जाते है जिन्हें सरेआम नकारा भी जाता है। लिहाजा! जनता जो अपनी ज़बान में बात कर रही है उस पर गौर फ़रमाए न कि बौद्धिक जुगाली के चक्कर में पड़े।)

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