विधायकों, मंत्रियों द्वारा सा. स्वास्थ्य केंद्रों को गोद लेते समय वहां पर फार्मासिस्टों के पद बढ़ाने पर भी विचार करना होगा

फार्मासिस्ट फेडरेशन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर किया अनुरोध

मऊ। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी के निर्देश पर पूरे प्रदेश के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को विधायकों एवं मंत्रियों द्वारा गोद लेकर उसकी व्यवस्था को सुदृढ़ करने का स्वागत करते हुए फार्मासिस्ट फेडरेशन एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री योगी को पत्र लिखकर यह भी मांग की है कि वहां उत्कृष्ट कार्य के लिए जनहित में फार्मासिस्ट के अतिरिक्त पदों को सृजन किया जाना आवश्यक हैं । पत्र की प्रति मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव कार्मिक, अपर मुख्य सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य, महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य को भी प्रेषित की गई है ।
फार्मासिस्ट फेडरेशन ऑफ यूपी के प्रांतीय उपाध्यक्ष डॉ0 सरफराज अहमद ने एक विज्ञप्ति के माध्यम से कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति सुधारने की मुख्यमंत्री द्वारा एक अच्छी पहल की जा रही है, परंतु सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की सबसे बड़ी समस्या वहां मानव संसाधन की कमी है, इसलिए वहां के भवनों की मरम्मत के साथ ही मानव संसाधन बढ़ाया जाना भी आवश्यक है ।

उन्होंने कहा कि हमारे देश की अधिकांश जनता ग्रामीण क्षेत्रो में निवास करती है अतः प्रदेश के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर जनहित को देखते हुए कार्य एवं आवश्यकतानुसार फार्मासिस्ट के पदों के मानक में संशोधन किया जाना अनिवार्य है ।प्रदेश में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) 24 घंटे सेवा देने वाला प्रथम रेफरल केंद्र है, जहां विशेषज्ञ देखभाल की व्यवस्था है ।
मानक के अनुसार वहां केवल 2 फार्मासिस्ट के पद हैं जबकि 24 घंटे की 3 शिफ्ट है सभी में एक फार्मासिस्ट आकस्मिक सेवा एवं मेडिकोलीगल के लिए ड्यूटी रूम में रहना अनिवार्य है , लेकिन 2 लोगो से 24 घंटे ड्यूटी रूम में उपस्थिति व्यवहारिक नहीं है, इसलिए अकसर एक फार्मेसिस्ट लगातार 24 से 36 घंटे अस्पताल में रहकर सेवा कर रहा है । वहीं औषधि भंडार, मेडिसिन काउंटर पर आने वाले मरीजो हेतु कम से कम 2 फार्मेसिस्ट, इंजेक्शन, ड्रेसिंग रूम, प्लास्टर रूम, माइनर ओटी आदि सेवाओ हेतु न्यूनतम 2 फार्मासिस्ट होने ही चाहिए ।
यह भी संज्ञानित है कि संक्रामक रोगों सहित बाल एवं मातृ शिशु कल्याण, ग्रामीण स्वास्थ्य हेतु सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से पूरे ब्लॉक के स्वास्थ्य कार्यकताओं/ आंगनबाड़ी/ आशा आदि को भी दवाएं वितरित की जाती हैं ।
राष्ट्रीय कार्यक्रमो में भी फार्मासिस्ट की ड्यूटी लगाई जाती है ।आवश्यकतानुसार वी आई पी ड्यूटी में एम्बुलेंस में भी फार्मासिस्ट की ड्यूटी होती है । राष्ट्रीय कार्यक्रम नसबंदी/नलबंदी के दिन मरीजो को दवा वितरण के साथ ही कैम्प का प्रबंधन भी फार्मासिस्ट द्वारा किया जाता है ।
इस प्रकार न्यूनतम 7 फार्मासिस्ट के कार्य एवं दायित्व का निर्वहन मात्र 2 फार्मासिस्ट द्वारा संचालित होने से जनता को उचित व गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाऐं उपलब्ध होने में निश्चित ही कठिनाई आती है ।
उन्होंने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सा, प्रसूति और स्त्री रोग, सर्जरी, बाल रोग, दंत चिकित्सा आदि विशेषज्ञ सेवाएं संचालित हैं. परंतु उक्त केंद्रों पर मानक के अनुसार फार्मासिस्ट के केवल 2 पद सृजित होते हैं. पूर्व में सृजित केंद्रों पर चीफ फार्मासिस्ट के एक पद आवंटित किए गए थे परंतु मानक में संशोधन ना होने से नवसृजित सीएचसी पर अभी चीफ फार्मासिस्ट के पद भी सृजित नही हो रहे।
संघ का कहना है कि शासन स्तर पर मानक संसोधन पर कई बार सहमति भी बनी है, महानिदेशालय से प्रस्ताव भी भेजे गए हैं लेकिन शासनादेश निर्गत ना होने से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर कार्य संचालन के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के फार्मासिस्ट को बुलाया जाता है, जिससे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की सेवाएं भी प्रभावित हो जाती हैं ।फार्मासिस्ट फेडरेशन ऑफ यूपी ने मुख्यमंत्री जी का ध्यान इस समस्या की ओर आकृष्ट कराया है।

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