मऊ जिला पंचायत में मनोज के विजय के बाद भाजपा में विधानसभा टिकट का गणेश परिक्रमा तेज

( आनन्द कुमार )
मऊ। साल 2021 चल रहा है 2022 के आने में अभी पूरे 6 महीने बाकी हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा सभा चुनाव में अपनी-अपनी दाल व अपनी खिचड़ी पकाने की हांडी नेताओं ने अभी से चढ़ानी शुरू कर दी है। हालांकि अभी चूल्हे की आंच मद्धिम है, लेकिन चुनाव से पहले चूल्हे की आंच को
बढ़ाने की कवायद में हर नेता जी जान से जुटा है। इसके लिए वो तमाम साम, दाम, दंड भेद लगा रहा है।
अब नेता जी लोग तो भले ही अपनी-अपनी गोटी सेट करने में जुटे हैं, लेकिन ये तो वक्त और किस्मत ही तय करेगी कि ऊंठ किस करवट बैठेगा ।
जब से जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट पर भाजपा के मनोज राय का निर्वाचन निर्विरोध हुआ है। तबसे मऊ के चारों विधानसभा में भाजपा नेताओं की गणेश परिक्रमा की रफ्तार बढ़ सी गयी है। विधायक बनने का सपना संजोए हर भाजपा नेता अपनी पसंद की विधानसभा सीट मन में तय कर वहां से टिकट पाने की जुगत में जी जान से दिन रात एक कर जुट गए हैं। ऐसे में पांच बार से लगातार सदर के विधायक मोख्तार अंसारी के खिलाफ भाजपा से सदर से टिकट मांगने वालों की संख्या कम नहीं है। इसके अलावा मधुबन से विधायक कैबिनेट मंत्री दारा सिंह चौहान, घोसी से विधायक विजय राजभर, व मुहम्मदाबाद गोहना सुरक्षित सीट से विधायक श्रीराम सोनकर में किसकी टिकट कटती है और किसकी सीट बदलती है इसपर भी चर्चा और मंथन की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। भाजपा की सीटिंग विधायक वाली तीनों सीट पर मौजूदा विधायकों को छोड़कर, दो दर्जन से ज्यादा भाजपा नेता टिकट की रस्साकशी में शामिल हैं। मऊ से सूबे और देश की राजधानी का सफर नेता पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों की चिन्ता किए बिना ही चालू कर चुके हैं।
ऐसे में इस बात से भी कत्तई इंकार नहीं किया जा सकता कि दलबदलू नेता आपदा में अवसर की तलाश में हैं। वैसे तो प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी अपने विधायकों की मौजूदा तीन की संख्या को चार के अंक में बदलने के लिए अभी से मंथन और चिन्तन कर रही है।

लेकिन भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को यह देखना होगा कि प्रधानमंत्री मोदी व मुख्यमंत्री योगी की छवि के सहारे विधायक बनने का सपना संजोए व वर्तमान विधायक को अगर पार्टी टिकट देती है तो सभी की छवि और क्षेत्र की जनता के बीच उनकी खुद की पकड़, स्थिति और परिस्थिति सभी का मूल्यांकन करना भी जरूरी होगा।
वर्ना मौजूदा परिवेश में भाजपा को पाने के लिए बहुत कुछ नहीं है लेकिन खोने के लिए ज्यादा है। भाजपा अगर ऐसे व्यक्ति को तव्वजो देती है जिसके मुठ्ठी में भाजपा के अलावा क्षेत्र में अपना बेहतर पकड़ है तो 2022 के महासंग्राम में जनता के रणक्षेत्र में चुनावी जंग का कुछ अलग ही रंग होगा।
केवल भाजपा की टिकट की बदौलत मोदी और योगी के नाम पर टिकट पाने की लालसा रखने वालों से भी परहेज करना होगा। एक बात और भाजपा को ध्यान देना जो बहुत जरूरी है वह यह है कि पार्टी को टिकट वितरण में स्थानीय नेताओं को तवज्जो देना होगा क्योंकि मऊ में दो चुनाव से आम जनता तथा स्थानीय नेताओं में यह मुद्दा काफी गरम है।
खैर प्रदेश के साथ-साथ मऊ में भाजपा के लिए 2017 का विधानसभा चुनाव किसी इतिहास से कम नहीं था। अब देखना होगा कि भाजपा 2022 के चुनाव में अपना इतिहास दोहराने के साथ-साथ पांच बार से विधायक बन रहे मोख्तार अंसारी को हराकर कोई इतिहास बनाती है या मऊ की जनता एक बार फिर शासन की आंख की किरकिरी बने माफिया डान मोख्तार अंसारी इतिहास बनने देती है।

