उत्तर प्रदेश

कहीं प्रत्याशी न बदल जाए!

@आनन्द कुमार…

पूर्व केन्द्रीय मंत्री व विकास पुरुष स्व. कल्पनाथ राय के निधन के बाद भले ही घोसी, मऊ की राजनीति का राष्ट्रीय फलक पर कोई पाज़िटिव नामलेवा न हो। निगेटिव नाम में, मऊ सदर के पूर्व विधायक मोख्तार अंसारी के नाम की चर्चा खूब रही हो, लेकिन वर्तमान में दशकों बाद राजनीति फलक पर मऊ चर्चा में रहा तो वे घोसी विधानसभा के उपचुनाव में, घोसी की चर्चा लगातार होती रही। देश की मीडिया की नजर थी, हर राजनैतिक दल की नज़र थी। 2023 के उपचुनाव में घोसी विधानसभा की सदस्यता व सपा से इस्तीफ़ा देकर, भाजपा में शामिल हुए और घोसी का प्रत्याशी बने दारा सिंह चौहान व सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के मुखिया ओमप्रकाश राजभर की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी। साथ ही इन दोनों नेताओं को भाजपावादी बनाने के बाद भारतीय जनता पार्टी के फैसले की अग्नि परीक्षा थी!
लेकिन घोसी की जनता जनार्दन ने उपचुनाव में अपने फैसले से भाजपा का सिस्टम, ओमप्रकाश राजभर व दारा सिंह चौहान का नाम होने के बाद भी सपा के सुधाकर सिंह से हार गया। पूरे देश की मीडिया ने खबर को खूब परोसा, भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की जमकर किरकिरी हुई लेकिन जनता अपने फैसले पर अडिग रही।

हार के प्रमुख कारणों में सुभासपा मुखिया ओपी राजभर की बदजुबानी!

घोसी उपचुनाव में भाजपा के दारा सिंह चौहान के हार के मुख्य कारणों में जो सबसे बड़ा कारण जनता के बीच में सुनने को मिला था वह है, सुभासपा मुखिया ओपी राजभर की ग़लत बयानी, श्री राजभर ने जब समाजवादी पार्टी का दामन थामा तो भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को अपने शब्दों की अभिव्यक्ति से गंभीर अश्लील कटाक्ष किया था, भाजपा का शीर्ष नेतृत्व, ओपी राजभर को अपने दल में शामिल करने के बाद भले ही राजनैतिक लाभ के लिए अपने ऊपर हुए जुबानी हमलों को भुला दिया हो, लेकिन घोसी की जनता ने ओमप्रकाश राजभर के निन्दनीय शब्दों का बदला ही नहीं चुकाया बल्कि बुरी तरह से हराकर राजनीति में हर फैसले मंजूर नहीं है संदेश भी दे दिया।

ऐसे में ओपी राजभर के बयान का बिना वजह शिकार हुए दारा सिंह चौहान…

दारा सिंह चौहान चाहे जितना भी दल बदले हो, लेकिन घोसी उपचुनाव में उनके हाथ का प्रमुख कारण में सुभासपा मुखिया ओपी राजभर की बदजुबानी ही ज्यादा है। अब इसे कोई स्वीकार करें या ना करे, लेकिन जनता ने जो निर्णय सुनाया और क्षेत्र में अपनी अभिव्यक्ति दी वह तो यही संकेत देता है। नहीं तो दारा सिंह चौहान ने दल भले बदला लेकिन कभी भी किसी दल के नेता व कार्यकर्ता के खिलाफ अपना मन नहीं बदला, वे अपने मृदुल व्यवहार हमेशा लोगों के दिल में जगह बनाए रखे, लेकिन इस बार ओपी राजभर के बयान के वे ऐसे शिकार हुए कि उनका दल बदलना भारी पड़ा ।

जनता ने जिसे हराया, भाजपा ने उसे मंत्री बना सबको चौंकाया…

घोसी विधानसभा के उपचुनाव में जनता की अदालत ने जिस दारा सिंह चौहान के खिलाफ फैसला सुनाया, उसे भाजपा ने कुछ माह के अंदर ही एमएलसी से मंत्री बनाकर सबको चौंका दिया। दारा के साथ साथ ओपी राजभर को भी भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने कई विभागों के मंत्री का दायित्व देकर यह संदेश दिया कि जनता से बड़ा नेता होता है! ऐसे में लोग कयास लगाते रहे लेकिन भाजपा ने वही किया जो भरोसा देकर सपा से दारा सिंह चौहान व ओपी राजभर को अपने दल में शामिल कराया था।

ओमप्रकाश राजभर व दारा सिंह चौहान की बदौलत कई सीटों पर निशाना…

भले ही जनता को भाजपा का यह फैसला नागवार लगे, लेकिन भाजपा ने इन दो नेताओं की बदौलत कई सीटों पर निशाना साधा है, अगर ओपी राजभर की बयानी की बात केवल घोसी में सिमट कर रह गई तो भाजपा, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी की बदौलत दूर दृष्टि पक्का इरादा की कहावत को चरितार्थ कर जाएगी। और सभी जानते हैं कि दारा सिंह चौहान व्यवहार के मामले में इतने व्यवहार कुशल हैं कि भले ही वे कांग्रेस, सपा, बसपा, भाजपा, सपा बाया पुनः भाजपा में आ गए हों, उन्होंने कभी किसी के खिलाफ दल से अलग होने के बाद भी ग़लत नहीं बोला है, इसलिए दारा सफलता के स्वयं के झंडे बुलंद कर लेते हैं।घोसी की सियासत की तपिश की गर्मी भले ही यहाँ अभी हो लेकिन यूपी के कई सीटों पर राजभर की राजनीति का लाभ पर भाजपा की पैनी निगाह है!

कहीं प्रत्याशी न बदल जाए!

ऐसे में अब तक कि जैसा चर्चा है और ओमप्रकाश राजभर ने स्वयं कहा है कि उनके पुत्र अरविंद राजभर घोसी से सुभासपा व भाजपा के संयुक्त प्रत्याशी होंगे। और वे क्षेत्र में जन सम्पर्क भी शुरू कर दिए हैं, समय से पहले अरविन्द राजभर को प्रत्याशी घोषित करना और घोसी का अंतिम चरण में एक जून को मतदान होने तक इतना लम्बा अंतराल है, घोसी उपचुनाव सरीखा जैसा कि लोकसभा चुनाव में जनता के बीच विरोध का स्वर फूट रहा है, कहीं तापमान चढ़ा तो एनडीए प्रत्याशी को लेने के देने पड़ सकते हैं! जनता ने छोटकी घोसी व बड़की घोसी का खेल खेला तो खेला हो जाएगा, क्योंकि वर्तमान में घोसी के प्रत्याशी सुभासपा मुखिया व कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के पुत्र अरविंद राजभर हैं। अगर सूत्रों पर विश्वास करें तो राजनीति में पकड़ रखने वाले ओपी राजभर ने नामांकन के पहले कहीं प्रत्याशी बदल दिया तो, घोसी लोकसभा की जीत को आसान समझ रहे सपा व बसपा के लिए नई राजनैतिक मुसीबत खड़ी कर देंगे! लोगों को डर है कहीं प्रत्याशी न बदल जाए!

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