देश ने एक रत्न खो दिया है जिसकी भरपाई इस युग में सम्भव नहीं : झारखण्डे राय
दोहरीघाट। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री, हिन्दी कवि, पत्रकार प्रखर वक्ता व भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर साहित्य परिषद गोठा द्वारा शोक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। शोक श्रद्धाांजलि कार्यक्रम में स्व. वाजपेयी के चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिये दो मिनट का मौन रखकर ईश्वर से प्रार्थना किया गयाा। परिषद के लोगों ने कहा कि अटल जी के व्यक्तित्व व कृतित्व व विचारों की सीख लेकर उन्हें अपने जीवन में उतारना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी ।
शोक संवेदना प्रकट करते परिषद के अध्यक्ष झारखण्डेय राय ने कहा कि देश ने एक रत्न खो दिया है जिसकी भरपाई इस युग में सम्भव नहीं है । अटलजी एक महापुरुष थे जिसकी अंन्तिम विदाई पर पुरा देश रोया। अटल जी ऐसे ही अटल नही हो गये । उनका व्यक्तित्व कृतित्व उनकी वाकपटुता हाजीर जवाबी का कोई जवाब नही था । वे मुस्कुराते थे तो लगता था नक्षत्रों की पंक्तियाँ हिल रही हैं ।अटल जी का पुरा जीवन इस बात का गवाह है कि पराजय व मन की न होने पर निराशा कभी उन पर हावी नही हो सकी यह युवाओं के एक संदेश है कि कैसे हार व निराशा को खुद पर हावी न होते हुए सकारात्मक नजरिये से अपना कर्म करते रहे। परिषद के उपाध्यक्ष रमेश राय ने शोक संवेदना प्रकट करते हुए कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी जी की पहचान एक कुशल राजनितिज्ञ प्रशासक भाषाविद कवि पत्रकार प्रखर वक्ता लेखक के रूप में है उन्होंने राजनित को दलगत और स्वार्थ की वैचारिकता से अलग हटकर अपना जीवन जिया ।और जीवन में आने वाली हर चुनौतियों को स्वीकार किया नीतिगत सिद्धांत और वैचारिकता का कभी कत्ल होने नही दिया राजनितिक जीवन में उतार चढ़ाव में उन्होंने ने आलोचना के बाद भी अपने को संयमित रखा ।राजनित के धुर विरोधी भी अटल जी के विचारधारा के कायल थे । ऐसे महापुरुषों का चला जाना राष्ट्र की एक बहुत बड़ी छति है । शिक्षक संजय राय ने कहा कि अटल के विचारों को आत्मसात करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी वे मानवता के ध्वजवाहक थे ।राष्ट्र की सम्प्रभुता के लिये वे कड़े फैसले लेते थे धर्म-निरपेक्षता के दूत थे उनकी सभी धर्मों में आस्था थी तथा हर धर्म के लोग उनका सम्मान करते थे ।ऐसा युग पुरूष का जाना पुरे देश को खल गया ।प्रबंधक पूर्व प्रधान विजेन्द्र राय ने कहा कि हे अटल आप अजर हो अमर हो भारत के इतिहास में अटल जी सम्पूर्ण ब्यक्तित्व शिखर पुरूषों के रूप में दर्ज है अटल जी ने जहाँ भारतीय सनातन संस्कृति को पुरी दुनिया में फैलाया वहीं पोखरण जैसा आणविक परिक्षण कर दुनियां के शक्तिशाली देश अमेरिका को भी और दुसरे देशों को भी अपनी शक्ति का एहसास कराया।
लोग उनके विराट ब्यक्तित्व के कायल थे ।कवि श्रीकान्त श्रीवास्तव ने कहा कि अटल जी के निधन पर जहाँ साहित्य जगत पुरी तरह मर्माहत है वही हिन्दुस्तान रो रहा पशु पक्षी भी रो रहे हैं तुम्हें शत-शत नमन कहते हुए भावुक हो गये ।परिषद के मंत्री बीरेन्द्र उपाध्याय ने शोक संवेदना प्रकट करते हुए कहा कि अटल जी सेवाभाव से भरपूर थे उनका समर्पण भाव देखते ही बनता था ।वे कहते थे मेरी कविता जंग ऐलान है पराजय की प्रस्तावना नहीं व हारे हुए सिपाही का नैराश्य-निनाद नहीं जूझते योद्धा का जय संकल्प है वह निराशा का स्वर नही आत्मविश्वास का जयघोष है । उनकी मेरी इक्यावन कविताएँ हार नही मानूँगा रार नही ठानूंगा ।पढ़कर स्वयं में एक देशभक्ति का जज्बा पैदा हो जाता है तथा आत्मबल भी मिलता है आज यह परिषद उनके कृतित्व को याद कर स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा है ।देश के लिये यह दुख की घड़ी है ।आशा है हम इस दुख की घड़ी से उबरकर अटल जी के बताये हुए रास्ते पर चलकर अपने वतन की मजबूती के लिये एकजुट होकर काम करेंगे । अटल जी को श्रद्धांजलि देने वालों में परिषद के उपाध्यक्ष अजीत कुमार राय, रामविलास राय, दुधनाथ गुप्त, रामनगीना राय, दुखन्ती कुम्हार, रामबचन राय, संजय राय, राजेश राय, श्यामसुन्दर मौर्य, अनिल गुप्त, विजरनारायण राय, प्रेमचन्द पाण्डेय, सीताराम पटवा, विनय राय, बिपिन राय, उमेश राय, ओंकार चतुर्वेदी, जयकृष्ण राय, रामशरीष यादव, आशीष राय, चंचल राय, पवन उपाध्याय, गिरीश राय, राजेश राय, मनोज गोड़, मनीष यादव, विनय गुप्त समेत आदि लोग मौजूद रहे।


