दीपक को तुम बुझने न देना, इंसानियत को तुम मिटने न देना…
✍️वर्षा… चल रही अकेली वोपीछे से आ रहे चार वोडरी-सहमी सी भाग रही वोउनके भी पैर तेज होते देख वोसड़क
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✍️वर्षा… चल रही अकेली वोपीछे से आ रहे चार वोडरी-सहमी सी भाग रही वोउनके भी पैर तेज होते देख वोसड़क
Read More(शब्द मसीहा केदारनाथ) रात के ग्यारह बजे नेता जी घर लौट आए थे । सब लोग खाने पर इंतजार कर
Read Moreमेरी कलम से…आनन्द कुमार प्लीज,बस करो रहने दो,इसे क्षत्रिय समाज से मत जोड़ो,इसे फारवर्ड, बैकवर्ड मत बनाओ,दलित, अति दलित भी
Read More( देव कान्त पाण्डेय ) वे हमसे बोले पंडित हो,पढ़े-लिखे भी दिखते हो,फिर ‘उस पंडित’ के बारे में, अच्छा क्यों
Read Moreमेरी कलम से ….अखिलानंद यादव अपनो से आंगन हो जुड़ेमां-बाप के सपने हो पूरे दूर हो सारे शिकवे गीलेभाई में
Read Moreयदि आप दूसरों के लिए भगवान से प्रार्थना करने की आदत विकसित करते हैं। तो आपको अपने स्वयं के लिए
Read Moreमेरी कलम से…आनन्द कुमार मैं जाति पुरुष में जन्म लिया,इस पर मेरा था कोई अधिकार नहीं,नारी ही है मेरी जीवन
Read More(मान बहादुर सिंह “मानु”) मैं मरा कई बार ……. नसों से सारा रक्त निचोड़कर ज़र्द ,सुन्न चेहरे से मरते देखा
Read Moreजब हम गलत होते हैं और आत्मसमर्पण कर देते हैं इसका मतलब है कि हम ईमानदार हैं,जब हम दुविधा में
Read Moreघर का मुखिया बनना आसान नहीं है। उसकी हालत टीन के उस शैड जैसी होती है जो बारिश, तूफान, ओलावृष्टि
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