रचनाकार

रचनाकार

रे पंडित कितने हैं चालाक, देख कर होते बुरे हालात भरने को तोंद पांडे ने अपनी, कोरोना माता रच डाली

(शब्द मसीहा केदारनाथ) जम के शुरू हुआ व्यापारचढ़े चूड़ी, चुनरी ओ हारमुंडने लगे सभी नर नारचढ़ने लगीं थाली पे थालीभरने

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