यादों के इस संसार में…
( आशु कवि के. पी. चौहान आरजू )
कहां ढूंढे हम अपनों को
जो तोड़ गए सब सपनों को
और आप गुम हो गए लाशों के अंबार में
हम कहां ढूंढे अब आपको यादों के इस संसार में
धोखेबाज मिलते हैं हर मोड़ परमददगार खो गए हमें छोड़ कर परम ज्योति के दरबार में
गुम हो गए लाशों के अंबार मेंकहां कहां ढूंढे अब आपको
यादों के इस संसार में
2 गज जमीन और चार कंधे भी नहीं मिले मतलबी संसार में
जो दुनिया छोड़ कर कर चले गए अपनों के इंतजार में
बड़े ही मगरूर हुआ करते थे अपनों की शान में
उनको ना ही कब्रिस्तान नसीब हुआ
और ना ही जगह मिली श्मशान में
क्या कोई कमी रह गई थी अपनों के प्यार में
जो अकेले ही जाना पड़ा फिर अपने संसार में
छीन ले गई कोरोना महामारी अपनों से अपनों को
और जीवन भर की टीस दे गई घर परिवार को
चकनाचूर कर गई सब सपनों कोछोड़कर चले गए मझधार में जो अपनों को
क्या कोई कमी रह गई थी हमारे प्यार में
जो आप शुमार हो गए परम ज्योति के संसार में
क्या हमें सिर्फ दुनिया के सहारे ही छोड़ने आए थे
यादों के इस संसार में।आशु कवि” शिक्षक : के.पी.चौहान आरजू ग्राम एवं पोस्ट guran तहसील सांवेर जिला इंदौर मध्य प्रदेश मोबाइल नंबर 98260 31 513


बहुत सुंदर रचना