रचनाकार

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रक्तदान ही महादान हौ, सब कर जान बचाई हो, कई के रक्तदान हे बेटवा, लेता नाम कमाई हो।

( सूबेदार पाण्डेय कवि ) रक्तदान ही महादान हौ, सब कर जान बचाई हो।कई के रक्तदान हे बेटवा, लेता नाम

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इस विपदा के समय राग द्वेष, गिले-शिकवे सब भूल कर एक साथ मिलकर एक दूजे की सहायता करनी चाहिए

(कृष्णा भिवानीवाला ) आज हम सभी जानते हैं, कि करोना जैसी भयंकर महामारी ने चारों और अपने पंख फैलाए हवा

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जरूरतमंदो के मसले पर अब कौन लिखेगा, सोचके यह जरूरतें बुनियादी लिखनी पड़ती हैं

( बृजेश ) उम्मीद लिखनी थी नाशादी लिखनी पड़ती है,तरक्की की जगह बरबादी लिखनी पड़ती है ।गुलामी की जंजीरों ने

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