UP में पंचायत चुनाव राजनीतिक दलों के चुनाव निशान पर हो : अतुल कुमार अनजान

उत्तर प्रदेश में हाल ही में संपन्न हुआ तीन स्तरीय पंचायत चुनाव ग्राम प्रधान , बीडीसी मेंबर एवं जिला पंचायत सदस्यों के चुनाव में व्यापक हेरफेर ,नियम कानूनों की अवहेलना, खुला बाजार बनकर रह गया । चुनाव के बाद तत्काल ही इन्हीं कारणों से ब्लाक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव नहीं कराए गए और कुछ अनावश्यक तर्कों का सहारा देकर टाले गए । चुनाव परिणामों से पूर्व जिला पंचायत के सदस्यों के चुनाव में विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपने घोषित उम्मीदवार करके चुनाव में भाग लिया। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के घोषित उम्मीदवारों ने कुल 11 जिलों में बहुमत हासिल किया । 3050 जिला पंचायत सदस्यों में 1020 निर्दलीय निर्वाचित हुए। समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार लगभग 18 जिलों में बहुमत पाने में सफल रहे। प्रदेश के प्रमुख धार्मिक नगरी अयोध्या ,मथुरा और काशी भाजपा के आधे दर्जन भाजपा के सदस्य ही निर्वाचित हो सके । जिस प्रकार से जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव पंचायत राज व्यवस्था नियमों को चुनौती देकर कराए जा रहे हैं वह गंभीर प्रश्न खड़े कर रहे हैं । उक्त विचार व्यक्त करते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय सचिव अतुल कुमार “अनजान” ने कहा कि 16 जिलों के जिला पंचायत अध्यक्ष निर्विरोध निर्वाचित हो गए और इनमें सभी भाजपा के जीते । जब भाजपा को बहुमत ही नहीं मिला तो अध्यक्ष कैसे चुने गए । भारतीय जनता पार्टी ने लोकतांत्रिक मर्यादाओं की सारी सीमाएं तोड़ दी । मोदी- योगी राज में खुले आम जिला पंचायत के निर्दलीय सदस्यों और दूसरे दलों के सदस्यों को प्रशासनिक प्रताड़ना एवं खरीद-फरोख्त के द्वारा अपने पक्ष में किया गया । कई जिलों में जिला पंचायत के सदस्यों को 30 से 40 लाख रुपया भाजपा नेताओं ने देकर उन्हें अपने समर्थन में खड़ा किया । राष्ट्रीय और प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष 65 जिलों में भाजपा के जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव जीतने का सार्वजनिक दावा कर चुके है । यह पूरे चुनाव को हास्यास्पद बना देता है। चुनाव में बहुमत ही नहीं मिला तो फिर कैसे अध्यक्ष पद जीता l साफ-साफ है , बाजार गर्म है। भाजपा का यह नारा कीयह अलग किस्म की पार्टी है । वास्तव में उत्तर प्रदेश के चुनाव में साबित कर दिया । भाकपा नेता ने आगे कहा कि जिला पंचायतों के अध्यक्ष चुनाव के बाद ब्लाक प्रमुखों के चुनाव में भी प्रशासन के जोर दबाव के साथ-साथ बीडीसी सदस्यों को 4 से 5 लाख रुपए का प्रलोभन भाजपा के द्वारा दिया जा रहा है l वह प्रदेश के 700 से अधिक ब्लॉक प्रमुखों में अपनी पार्टी की जीत सुनिश्चित करने के लिए साम-दाम-दंड-भेद का हथियार इस्तेमाल कर रहे हैं । अतुल कुमार अनजान ने आगे कहा कि लोकतंत्र के ग्रामीण जीवन भ्रष्टाचार से लेस कर देने का काम भारतीय जनता पार्टी ने कर दिया है । ऐसी स्थिति में हम सभी राजनैतिक चलो एवं राष्ट्रपति से मांग करते हैं की पंचायतों के चुनाव में पार्टी के चुनाव निशान पर कराए जाए ताकि भ्रष्टाचार के नंगे नाच को रोका जा सके ।


