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भारतीय वैज्ञानिकों के ज्ञान के सामने हारा कोरोना

मऊ। भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत गठित नेशनल काउंसिल फार साइंस एंड टेक्नोलाजी कम्यूनिकेशन की ओर से ग्रामीण इलाकों में वैज्ञानिक सोच एवं तकनीकी प्रवृत्ति को विकसित करने के लिए जिले के सरवां गांव में स्थित विद्यापीठ पब्लिक स्कूल में ‘अनरिच्ड टू रीच’ विज्ञान शिक्षा कार्यशाला का आयोजन किया गया। दो दिवसीय आयोजन में मंगलवार को केंद्रीय संस्थानों से आए वैज्ञानिकों ने ग्रामीण छात्रों को अनेक जटिल वैज्ञानिक रहस्यों को आसान शब्दों में समझाया। बीएचयू से आए वैज्ञानिक डा.फणींद्रपति पांडेय ने कहा कि यह भारत के विज्ञान के ज्ञान की ही ताकत थी, जिसके सामने कोराेना वायरस को नतमस्तक होना पड़ा। भारतीय वैज्ञानिकों ने वैक्सीन खोजकर कई देशों के नागरिकों की जान बचाया। कार्यशाला का शुभारंभ बतौर मुख्य अतिथि राज्य शिक्षक पुरस्कार प्राप्त डीएवी के प्रधानाचार्य देवभाष्कर तिवारी, भाजपा नेत्री डा.सीता राय, समाजसेवी गोपाल तिवारी आदि ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यशाला में विद्यालय के बच्चों ने एक से बढ़कर एक वैज्ञानिक माडलों की प्रदर्शनी लगाई। ग्रामीण छात्रों के बीच विज्ञान की अलख जगाते हुए वैज्ञानिक डा.फणींद्र पति ने कहा कि यह विज्ञान की ही प्रगति है कि आज हर भारतीय को अन्न मिल रहा है। स्वास्थ्य रक्षा हो या देश की सुरक्षा, वैज्ञानिकों ने अनेक आविष्कारों के जरिए भारत को मजबूत किया है। लखनऊ विवि से आई डा.आयुषी रस्तोगी ने एलसीडी के बारे में विस्तार से समझाया। वैज्ञानिक डा. प्रेमप्रकाश सिंह, डा.राजकमल यादव एवं डा.प्रभा भारतीय ने कई जटिल वैज्ञानिक घटनाओं को आसान भाषा में समझाया। केशव शिक्षा समिति के संयोजक रवि पांडेय एवं बिजली यादव ने केंद्रीय संस्थानों से आए वैज्ञानिकों को सम्मानित किया। विद्यालय की ओर से उत्कृष्ट माडल प्रस्तुत करने वाले छात्रों को पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर नाजिया अहमदी, पदमेश तिवारी, विज्ञान शिक्षक ऋषिकेश पांडेय आदि उपस्थित थे।

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