नर्सिंग डे पर बहनों को सादर समर्पित…
( किशोर कुमार धनावत )
“नर्सिंग डे” पर मुझे उन नर्सों की याद आरही है जब मुझे मेंदान्ता(गुड़गांव) होस्पीटल में “स्टेंन्ट” लगे थे, उस समय नर्सों की देखभाल भूल नहीं सकता|अपने भाव समर्पित करता हूँ:-
जीवन संध्या के पड़ाव पर,
जब कोई नर्स आती है|
उर्जा का भंडार होती है वो,
और “सिस्टर” बन जाती है|
स्नेह सागर की गागर होती,
अपना कर्तव्य निभाती है|
जात पात और लिंग- भेद,
सब कुछ भूल जाती है|
श्वेत लिबास तन पर होता,
मन को ढ़ांढ़स बंधाती है|
आराम का समय नहीं मिलता,
स्टूल पर ही उंघ जाती है|
मरीज जब घर को जाता,
उसकी याद बहुत आती है|
नि:स्वार्थ सेवा समर्पण से,
दोनों आंखें छलक जाती है|
(नर्सिंग डे पर बहनों को सादर समर्पित)
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किशोर कुमार धनावत, रायपुर|
१२-५-२०२१

