वेंटिलेटर पर मऊ, आइसोलेशन में नेता, आईसीयू में अफसर, आक्सीजन की तलाश में जनता
प्रदीप सिंह / आनन्द कुमार
मऊ। ताज्जुब करने लायक नहीं है माना जाए तो यह सच दिखता है कि वेंटिलेटर पर जनपद, आइसोलेशन में नेता, आईसीयू में प्रशासनिक अफसर और ऑक्सीजन की तलाश में भटक रही जनता है। ऐसे हालात कब तक रहेंगे लॉकडाउन के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
वैसे तो यह बानगी उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद की, जिसे सच में अपने जनपद के रहनुमा जर्रे-जर्रे पर जिस शख्स की शिलापट्ट लगी है उस स्व. कल्पनाथ राय की याद आ रही है। आज जनपद की पूरी चिकित्सकीय व्यवस्था चरमरा सी गई है। अखबारों व हुक्मरानों के फाइल में देखों तो कोविड19 के प्रकोप से बचने व बचाने का अनेको उपाय किया जा रहा है लेकिन सरकार के चिकित्सकीय इंतजाम पर एक नजर डाली जाए तो स्पष्ट रूप से दिखता है कि ऊंट के मुंह में जीरा वाली कहावत चरितार्थ हो रही है।
जनप्रतिनिधियों की प्रेरित कार्य पर एक नजर डाली जाए तो यहां पर सत्तारूढ़ दल भाजपा के कैबिनेट मंत्री दारा सिंह चौहान के अलावा दो विधायकों में श्रीराम सोनकर और विजय राजभर है। जबकि बसपा के बाहुबली विधायक बांदा जेल में ही अपनी सियासत चला रहे हैं वही घोसी के सांसद भी नैनी जेल में अपना आशियाना लंबे समय से बनाए हुए हैं। एमएलसी एके शर्मा थोड़ा बहुत कुछ करते नजर आ रहे हैंं तो एमपी अतुल राय से भी जेल से ही जो बन पड़ रहा है वह कर रहे हैं।

बसपा से सांसद अतुल राय जेल में हैं उनसे जो बन पड़ रहा है,वे कर रहे हैं। वैसे तो उन्होंने जेल से ही जिलाधिकारी मऊ को पत्र लिख कर आक्सीजन प्लांट के लिए भूखंड की मांग कर अपने निजी श्रोत से लगवाने की बात करके जनता को संजीवनी देने का कार्य किया है। इसके अलावा वे आनलाईन चिकित्सकीय सेवा के साथ दवा वितरण का कार्य कर रहे हैं।
बसपा के ही सदर विधायक की बात करें तो विधायक मोख्तार अंसारी के टीम का कहीं कुछ अता पता नहीं चल रहा है। दूसरे भाजपा विधायक घोसी के विजय राजभर हैं जो जनता की उम्मीद पर खरे उतरते नहीं दिख रहे हैं। इनसे जनता को मायूसी हाथ लग रही है।
तीसरे भाजपा विधायक मोहम्मदाबाद गोहना के श्रीराम सोनकर भी चिकित्सिय सेवा के मैदान- ए – जंग में दिख नहीं रहे हैं। वही भाजपा के ही मधुबन के विधायक व यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री दारा सिंह चौहान जी दूसरे चरण के कोरोना काल में अब तक कहीं नजर नहीं आएं।
वैसे तो समूचे जिले की कमान संभालने का दम भरने वाले जनपद के प्रभारी मंत्री सुरेश पासी अपने पंचायत चुनाव के बाद अब तक जिले में कहीं भी कदम ताल करते नहीं देखें गए।
इसके अलावा स्नातक एमएलसी देवेन्द्र प्रताप सिंह व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपनी सीट छोड़कर बाद में पुन: एमएलसी बने भाजपा नेता यशवन्त सिंह व नवनिर्वाचित शिक्षक एमएलसी ध्रुवचन्द्र त्रिपाठी का कहीं अता पता नहीं चल रहा है। वहीं स्वेच्छिक सेवानिवृत्त आईएएस व नवनिर्वाचित विधानसभा परिषद सदस्य एके शर्मा मऊ सहित कई जनपदों में बहुत कुछ कोविड के मद्देनजर करने का दावा तो कर रहे हैं। लेकिन उनके सोशल मीडिया के फेसबुक पेज की कहानी और मऊ चिकित्सिय व्यवस्था की बानगी मेल खाती नहीं दिख रही है। कहा जाए कि करोना कॉल में चिकित्सीय व्यवस्था में सरकार का सिस्टम और प्रशासन की व्यवस्था पूरी तरह से दोनों फेल नजर आ रही है तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। महामारी भरी आपदा के दौर में यहां की जनता बेबस होकर चिलचिलाती धूप में सड़कों और अस्पतालों की दहलीजो पर दर-दर की ठोकर खाते नजर आ रही है।
वहीं जिला प्रशासन के आला अधिकारियों में डीएम से लेकर एडीएम, सीडीओ, एसडीएम, तहसीलदार, सीएमओ, सीएमएस, मजिस्ट्रेट सभी कोविड-19 के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाने का दावा तो कर रहे हैं लेकिन धरातल पर उनके कार्य, सच्चाई व दावों की पोल खोलती जनता नजर आ रही है। यह कहने में बिल्कुल गुरेज नहीं है कि मऊ का जो हाल है वह यही है कि वेंटिलेटर पर जनपद है। आइसोलेशन में सत्तारूढ़ दल समेत विभिन्न दलों के नेता तथा आईसीयू में प्रशासनिक अफसर व आक्सीजन की तलाश में जनता दर दर की ठोकरे खा रही है।
वास्तव में अब सड़कों पर जनता अपनी आवाज बुलंद करने लगी है अस्पतालों में भी आए दिन हाथापाई कभी गैस को लेकर तो कभी दवा को लेकर हो हल्ला मच रहा है यहां तक कि सरकारी अस्पतालों में चिकित्सक अपनी ड्यूटी करने से कतरा रहे हैं मुख्य चिकित्सा अधिकारी से लेकर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक तक का स्वास्थ्य माथे पर कोई अंकुश नहीं रह गया है ऐसे में जनता का जवाब यानी धैर्य कभी भी छूट सकता है और आने वाले समय में प्रशासन के लिए परेशानी का सबब खड़ा हो सकता है।
जनता अपने रहनुमाओं को बेसब्री से खोज रही है लेकिन रहनुमा मास्क लगाकर अपने-अपने घरों में रुके हुए हैं शायद उन्हें लाक डाउन के खुलने का इंतजार है ऐसे में आए दिन जनता दम तोड़ती नजर आ रही है इसकी सच्चाई देखनी हो तो तमसा नदी के तट पर और विभिन्न कब्रिस्तानों में अंतिम संस्कार किए जा रहे हैं शायद प्रशासन के पास इनकी कोई रिकॉर्ड नहीं है।
बहरहाल करोना महामारी के दौर में आगे प्रशासनिक अफसरों और सत्तारूढ़ दल के नेताओं की मेहनत क्या गुल खिलाएगी यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

