इजरायल को अपनी भी राम राम…..
( उपेन्द्र शर्मा )
यह संयोग ही है कि अभी 10 दिन पहले ही एक युवा भारतीय इंजीनियर जोड़े से मिलना हुआ जो हाइफा (इजरायल) से कोविड के कारण अपने घर (राजस्थान) लौटे हैं…वे इजरायल के उस शहर हाइफा में रहते थे जहां इजरायल सरकार ने कृतज्ञतावश राजस्थानी वीरों का एक शहीद स्मारक बनाया हुआ है…यह स्मारक ब्रिटिश सेना के तहत हाइफा की रक्षार्थ तुर्की सेना के खिलाफ लड़े राजस्थानी वीरों का है…वहां लिखा है कि “इन वीरों के कारण आज हाइफा इजरायल में है और हम इसे सदा याद रखेंगे…”
माहेश्वरी समाज के उस पूर्णतः शाकाहारी युवा जोड़े ने बताया कि आईआईटी से इंजीनियरिंग करने के बाद वे दुनिया भर में घूमे हैं, लेकिन जितना सम्मान यहूदी और इजरायल वाले भारतीयों का करते हैं, उतना कोई और देश नहीं करता…वे भारतीयों को अपना सगा ही मानते हैं…सच वाला बिरादर…
जयपुर में रहने के दौरान मुझे दो बार इजरायल के राजदूत और अन्य अफसरों से राजस्थान पत्रिका के मुख्यालय में मिलने और बातचीत का अवसर भी मिला। उसके बाद पहली विदेश यात्रा का मौका भी इजरायल से ही आया, हालांकि यह अंततः हो ना सका। उसके बाद अजमेर रहने के दौरान पुष्कर में बहुत से यहूदी पर्यटकों से मिलना हुआ। और जब अहमदाबाद पहुंचा तो फ़िर वहां तो पूरी कॉलोनी ही है उनकी…
अहमदाबाद का चिड़ियाघर एक यहूदी रुबेन डेविड ने बनाया था। मेरे दफ्तर के रास्ते में एक यहूदी कब्रिस्तान भी था, जहां कब्रें अन्य धर्मों के विपरीत भारतीयों की समाधियों या ग्रामीण लोक देवताओं के चबूतरों-स्थलों की तरह ऊंची-ऊंची थीं..संभवतः दोनों का यह साम्य प्राचीन मानव संस्कृतियों के कारण है…दोनों ही संस्कृतियां उन्मुक्त, स्त्री प्रेमल, उदारता, सहिष्णुता, आधुनिक, तार्किक और स्वतंत्र सोच वाली हैं…
अहमदाबाद में मैंने जाना कि यहूदी ही वो पहला विदेशी धर्म है जो भारत भूमि पर सबसे पहले आया है, लेकिन हमले की शक्ल में नहीं…आज भी ऐसा कोई अंतरराष्ट्रीय मामला नहीं जिसमें इजरायल भारत का साथ ना देता हो, यह अलग बात है कि 1948 में बने इस खूबसूरत और हिम्मती देश इजरायल को हमारी सरकारों ने वोट बैंक के चलते 1992 तक तो मान्यता ही नहीं दी थी… दो बरस पहले इजरायल के पीएम नेतन्याहू ने अहमदाबाद की यात्रा की थी… जब उन्हें गुजरात में यहूदियों के विषय में बताया तो उन्होंने साबरमती मैया को प्रणाम किया…. अभी कोरोना के खिलाफ भी इजरायल व भारत एक दूसरे से हाथ मिलाए हुये हैं…
इस संसार में सबसे ज्यादा नोबल पुरस्कार यहूदियों को ही मिले हैं। खासकर टेक्नोलोजी और विज्ञान में तो उनका खासा दबदबा है। जबकि संसार के 700 करोड़ लोगों में से वे सिर्फ 90 लाख ही हैं… अमेरिका की अर्थव्यवस्था में उनकी खास भूमिका है… राजनीति शास्त्र की पीजी कक्षाओं में उन्हें वहां एक खास तरह का “दबाव समूह” (pressure groups) भी कहा जाता है। अमेरिका में स्थापित यह दबाव समूह ही इजरायल की मूल ताकत है… कई बार इजरायल ने अपने पड़ोसी मुल्कों की खाल में भूस भरी है.. इजरायल के इन युद्ध विजयों को भी दुनिया भर के विवि पाठ्यक्रमों में पढ़ाया जाता है….कभी दुनिया में नारा था “इजरायल को बचाओ” और आज नारा है “इजरायल से बचो…” वैश्विक आतंकवाद की जो कमर इजरायल ने तोड़ी है वो दुनिया के लिए एक मिसाल है.. नन्हा सा देश इजरायल यह कर सका, क्योंकि वहां प्रत्येक युवा लड़के लड़की को 2 साल फौज़ में बिताने होते हैं…
इस समय आप यह पोस्ट जो पढ़ रहे हैं वो मंच फेसबुक भी एक यहूदी मार्क जुकरबर्ग की ही देन है और हां व्होट्सप्प भी जुकरबर्ग भैया का ही है… और जिसे दुनिया का सबसे बुद्धिमान आदमी माना जाता है अल्बर्ट आईंस्टीन… वो काकोसा भी यहूदी ही हैं… और संसार का प्रत्येक व्यक्ति 24 घन्टे में जो भी 10 चीजें इस्तेमाल करता है उसमें से एक चीज़ इस नन्हें से लेकिन महावीर देश इजरायल की देन होती है…
अपनी ओर से भी इजरायल को राम-राम सा…

