आज का बुद्धिजीवी वेश्या बन गया है : पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह
(सुनील दत्ता कबीर)
आजमगढ़। आजमगढ़ की धरती बड़ी उपजाऊ है इस धरती से कला मनीषियों के साथ साहित्य के मनीषियों को जन्म दिया है। मैं इस धरती पर आया यह मेरा सौभाग्य है। मैं इस धरती को प्रणाम करता हूँ। उक्त विचार नेहरु हाल में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार मिडिया समग्र मंथन में अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्व विद्यालय वर्धा के प्रोफ़ेसर देवराज ने कहा उन्होंने आगे कहा कि यह धरती अदभुत धरती है जहां खड़ी बोली के रचियता आचार्य चन्द्रबली पाण्डेय, घुमक्कड़ शास्त्र व अनेक भाषाओं के ज्ञाता और स्वतंत्रता आन्दोलन में अपनी भूमिका निभाने वाले महाज्ञानी राहुल सांस्कृत्यायन, प्रगतिशील शायर कैफ़ी आज़मी जैसे विभूतियों की है। मैं इस मंच से अपील के साथ आपकी सहमती चाहता हूँ कि यहाँ पर आवासीय व शोध स्तर के विश्व विद्यालय की स्थापना होनी चाहिए। प्रो देवराज ने कहा कि आज देश की शासन सत्ता समाज के हर क्षेत्र में अपना हस्तक्षेप जारी रखे हुए है जो देश के लिए शुभ संकेत नही है। बाबा साहेब आंबेडकर, डा लोहिया नरेंद्र देव की चर्चा करते हुए कहा कि बाबा साहेब ने कहा था कि ऐसा लोकतंत्र होना चाहिए एक व्यक्ति एक वोट न हो बल्कि एक व्यक्ति एक मूल्य हो व्यक्ति के साथ मूल्य का जुदा होना आवश्यक है।
लेकिन देश के नेताओं ने पिछले 70 सालो में इसको बदल दिया या मूल्य बदलने की कोशिश में लगातार लगे हुए है लोहिया जी ने सौन्दर्य दृष्टि से मुख्य धारा में बदलने की पैरवी की थी उनका कहना था कि आंतरिक सौन्दर्य यथार्थ, वास्तविक जीवन धारा से जोड़ता है, वह महत्वपूर्ण है आचार्य नरेंद्र देव जी ने कहा था कि विचारों की आवश्यकता है। उसके साथ ही विचारों को स्वतंत्रता मिलनी चाहिए डा देवराज ने आगे कहा कि हमने लोकतंत्र को वोट तंत्र में बदल दिया है। जिसके कारण जो लोकतंत्र वास्तविक है ही नही इस व्यवस्था को लोग बदलते चले जा रहे है अगर समय रहते चेता नही गया तो यह लोकतंत्र मात्र नाम का रह जाएगा आज के समय में मिडिया का विस्तार हुआ है पर मिडिया वास्तविक सरोकारों से नजरे चुराता है। पत्रकारिता की जो प्रतिबद्धता है राजनीतिक, सामाजिक यथार्थ से मिडिया आज भागता है।
लोकतंत्र में लोक की भागीदारी कम हुई है जिसके कारण शिक्षा संस्कृति को बहुत बड़ा नुक्सान हो रहा है संस्कृति से ही हमारे जीवन के सारे पक्ष शुरू होते है। अब मीडिया परिष्कृत नही रहा गया मीडिया इसमें भी असफल रहा। उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र का भाषा से सम्बन्ध आज कम हुआ है। इस मामले में मीडिया का गहरा असर है। आज हमारी कला-संस्कृति के साथ भयानक साजिश हो रही है यही कला और संस्कृति मानव चेतना को जगाने का काम करती है।
क्रम को आगे बढाते हुए उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रकाश सिंह ने कहा कि कहने को तो देश में लोकतंत्र हैपर वो कही नजर नही आता देश के आला अधिकारी और नेता इस लोकतंत्र को कमजोर करने में लगे है, देश की अवाम को इस बात को समझना चाहिए अगर वो अपनी समझदारी नही खोलते है तो एक दिन बस नाम मात्र का लोकतंत्र देश में रह जाएगा पिछले तीन लोकसभा चुनाव का अगर हम आकलन करे तो हम पायेंगे 24% 30% 34% अपराधी लोग देश के उच्च सदन में बैठे है इन अपराधिक पृष्ठ भूमि के लोगो से देश क्या उम्मीद कर सकता है।
यह जो कुछ भी करंगे सिर्फ अपने लिए यह लोग दिखाने के लिए देश की तरक्की की आशा देते है पर यह लोग अपने धर्म, जाति क्षेत्र से बाहर की सोच रखते ही नही वर्तमान में लोकसभा का चरित्र बदल रहा है। मेरा मानना है अगर ऐसे ही रहा तो हमारा लोकतंत्र के बजाये यह देश क्रिमनल स्टेट बन जाएगा, पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह ने आगे कहा कि ऐसी ससंद किसलिए जहाँ पर कुछ काम नही हो रहा है यहाँ पर बस लोकतंत्र की कब्र खोदने का काम हो रहा है। अगर यही हाल रहा तो एक दिन कोई तानाशाह नेता आएगा और पूरे देश को अपनी मुठ्ठी में कर लेगा इस देश के बौद्धिक वर्ग को इसपे मंथन करना चाहिए पर ठीक इसके उल्टा हो रहा है।
यह बौद्धिक लोग बौद्धिक वेश्यावृति करने लगे है इन्हें जहाँ से पैसा मिलेगा यह बस उसी का गुणगान करेंगे। अगर लोग नही जगे तो आने वाले समय में भूल जाइए देश की आजादी को साथ ही लोकतंत्र को देश के लोकतंत्र में दीमक लग चूका है अब बारी है इस दीमको को साफ़ करने का, आजादी में हिन्दी मीडिया का महत्वपूर्ण रोल रहा है लेकिन अब पत्रकारिता के चरित्र में बड़ा बदलाव आया है यह चिंता का विषय है इसमें नैतिकता का दायरा सिमट रहा है। अगर मिडिया में खबर छपवानी है तो कुछ दान-दक्षिण दीजिये आपकी खबर छप जायेगी अब मिडिया का ऐसा रोल हो गया है। देश में विकास तो हो रहा है पर कुछ लोग मात्र अपना विकास कर रहे है। आज अगर पत्रकारिता बची है तो मात्र लघु पत्र और पत्रिकाओं के बदौलत
समाजवादी विचारक गोपाल राय ने सम्बोधन करते हुए कहा कि मीडिया राजनैतिक सत्ता से प्रभावित रहता है। जिसमे 72% खबर इन लोगो की होती है। जनता के सरोकारों का हिस्सा मात्र 6% या 7% ही रह गया है। राजनैतिक तौर पर सत्ता जो लोकतंत्र पर बोलेगा वही सच माना जा रहा है गाँव को शहर मुर्ख बना रहा है शहरों को महा नगर मुर्ख बना रहा है अब तो आम आदमी को सोचना है कि वो किस लोकतंत्र में जियेगा ?
समाजवादी विचारक विजय नरायण ने कहा कि हमने बहुत सेमिनार देखे है पर आज मैं यह बात दावे से कह सकता हूँ वर्षो बाद आज के सेमिनार में गंभीर और सार्थक चर्चा हुई है इसके लिए शार्प रिपोटर के सम्पादक अरविन्द सिंह और उनका पूरा कुनबा बधाई का हकदार है डा योगेन्द्र नारायण अरुण ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि आज मैं बहुत ही प्रसन्न हूँ की मुझे इस पावन धरती पर आने का सौभाग्य मिला है।
उन्होंने आगे कहा की लोकतंत्र खतरे में है अगर मिडिया ने अपना चरित्र नही बदला तो हमारा लोकतन्त पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगा देश के अवाम को इस बात को समझना होगा वो मात्र किसी नेता के लिए वोट नही है उसका वोट नैतिक मूल्यों का वोट है अभी भी वक्त है सम्भाल जाओ मरते लोकतंत्र को बचाने के लिए आगे आओ।
व्यस्तता के कारण नहीं आ पाने के कारण इलेक्ट्रानिक मीडिया के वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी ने नेहरु हाल के सभागार में लोगों को टेलीकांफ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित किया। साथ ही श्री वाजपेयी ने लोगों के सवालों का जवाब दिया।
इस दौरान अतिथियों ने मीडिया समग्र मंथन 2018 के दौरान शार्प रिपोर्टर मैगज़ीन के 10 साल पूरा होने पर उत्तर प्रदेश उत्तराखंड के अंक का विमोचन किया। वक्ताओं ने कहा कि अल्प समय में शार्प रिपोर्टर ने जो पहचान बनाई है वह वास्तव में काबिले तारीफ है।
इस दौरान डॉक्टर योगेंद्र नाथ शर्मा अरुण, गिरीश पंकज, वरिष्ठ पत्रकार जय शंकर गुप्त, प्रोफेसर देवराज, भड़ास के सम्पादक, यसवंत सिंह आदि मौजूद रहे।

