खास-मेहमान

बुद्ध की शिक्षा और मानवता के संदेश पर ऑनलाइन काव्यपाठ एवं परिचर्चा का आयोजन

विभिन्न विधा के प्रसिध्द कवियों एवं वक्ताओं ने महात्मा बुद्ध की सीखों पर दिये व्याख्यान

इंदौर। बुध्द पूर्णिमा पर शहर में ऑनलाइन काव्यात्मक परिचर्चा का आयोजन हुआ। जिसमें कवि और प्रसिद्ध गणमान्य नागरिकों ने भगवान बुद्ध के जीवन परिचय और उनके संदेशों पर प्रकाश डाला। ऑनलाइन व्हाटसप के माध्यम से विभिन्न विधा में पारंगत कवियों ने बुद्ध के चरित्र को कविता के माध्यम से बताया। वरिष्ठ श़ायर एवं गज़लकार बृजमोहन शर्मा ‘बृज’ ने भगवान बुद्ध के जीवन चरित्र पर प्रभावी उद्बोधन दिया। मालवी भाषी कवित्री हेमलता शर्मा भोली बेन ने कहा- बुद्ध पूर्णिमा पर भगवान बुद्ध का स्मरण करते हुए उनके तीन महत्वपूर्ण संदेशों को जीवन में उतारना ही सच्चे अर्थों में बुद्ध पूर्णिमा मनाना होगा- 1. शांति के मार्ग का अनुसरण करो। 2. सदैव सत्य के मार्ग पर चलो इससे हजार योद्धाओं पर विजय पाना आसान हो जाता है। 3. कभी किसी से ईर्ष्या मत करो क्योंकि जो दूसरों से ईर्ष्या करता है उसे शांति नहीं मिलती। इंदौर की कुहू ज्योति जैन ने काव्यपाठ में बुद्ध चरित्र बताया-जो निरहंकारी बनूँ तो बुद्ध हो जाऊं/जो सम्यकधारी बनूँ तो बुद्ध हो जाऊं/जो सोच सकूं आत्मा को तन से पृथक/जो सोच सकूँ देह को मन से अलग/जो छोड़ सकूँ प्रेम अपनी प्रियतमा का/जो तज सकूँ विलासिता से महल भरा/जो तप सकूँ आत्मा की शुद्धि में तो बुद्ध हो जाऊं/जो रम सकूँ असीमता की शक्ति में तो बुद्ध हो जाऊं/नही है सहज बुद्ध हो जाना/स्व को परे कर पर को अपनाना/मैं नही हो पाऊँगी बुद्ध कभी/प्रेम मुझे नही तजने देगा कुछ भी। होशगांबाद की सुनिता परसाई ने सुनाया- बुद्ध पूर्णिमा आज है मनाओ सभी जन आज/पीपल पेड़ पूजन करो, होवे पूरन काज/यौवन की दहलीज को ,रख दिया दरकिनार/राज पाट सब छोड़ कर, ले लिया वैराग्य/सच की खोज में निकल पड़े जब बुद्ध/पीपल पेड़ उनके चरणों से हुआ शुद्ध/करी तपस्या बुद्ध ने पाया है जग मान/बोध गया में बुद्ध ने पाया है ज्ञान। शिक्षिका पुष्पा सोलंकी महू ने सुनाया- जन्म, शिक्षा, और मृत्यु एक ही दिन हुई ऐसा सौभाग्य पाए/विश्व का तारण करने आए। भोपाल की आरती गेहलोद ने सुनाया- आज जब हर जगह फैला है डर का साया/तब मुझे बुद्ध का ही एक पैगाम याद आया/इस पूरी दुनिया में इतना अंधकार नहीं की वो/एक छोटे से दीपक के प्रकाश को मिटा सके/तो आओ हम सब मिलकर अंधकार को मिटाने के/लिए आशा का दीप जलाये/धरती को फिर से स्वर्ग बनाएं। आला चौहान मुसाफिर ने कहा-
जीवन संग्राम एक युद्ध होता है/सब कुछ त्याग कर बुद्ध होता है/जलाना पड़ता है कु-विचारो को/जब जाकर ही जीवन शुद्ध होता है। अलका जैन ने कहा-सिद्धार्थ राजकुमार रथ पर सवार नकले विहार पर/राह में मिला मरीज दर्द से बेहाल। मनोहरलाल सोनी बाबा ने कहा-आएगी नई सुबह आज हम जो ठान लें/मुँह ढांक कर रखे,दूर से ही काम ले/थोड़े दिन की बात है इम्तहान है कड़ा/घर से न निकलें अभी इतनी बात मान लें। भोपाल की प्रसिद्ध कवियत्री रश्मि दूबे ने सुनाया- गौतम बुद्ध घृणा को घृणा से नहीं/अंधकार को अंधकार से नहीं इन सभी/पर विजय है पाना, प्रेम रूपी आशा दीप जलाये रखना/गर वाणी हो मधुर, कठिन से कठिन कार्य भी करवा लेना/गुजर गया उसकी चिंता ना/करना/वर्तमान में ध्यान अपना केंद्रित कर लेना। महक डॉन गोधा ‘मासूम’ (दुर्ग छत्तीसगढ़) ने सुनाया- बुद्धमय हो गया दिन/बुद्धमय हो गई है रात/निज को निज में ढूंढने निकले/जब राजकुमार सिद्धार्थ/आत्म ज्ञान को पाया/की सबसे ज्ञान की बात। प्रेक्षा डॉन गोधा “परी” दुर्ग छत्तीसगढ़ ने मनहरण घनाक्षरी छंद सुनाया- केवलज्ञान की जोत/जब जले मन मे तो/आत्मज्ञान जरूर ही/मिल जाता है प्रभु/मन मे जो दया भाव/रख कर्म करते तो/चेहरा सुमन सा ही/खिल जाता है प्रभु/निकल पड़े वन में/करने तपस्या जब/सिंहासन इंद्र का भी/हिल जाता है प्रभु/सिद्धार्थ से बने कैसे/बुद्ध सब जान ले तो/सबका कल्यान होगा/दिल कहे हे प्रभु। राजमाला आर्य (खंडवा) एवं डाॅ. वर्षा गरिमा (मुम्बई) ने काव्यपाठ किया। आभार आला चौहान मुसाफिर ने माना। जितेन्द्र शिवहरे ने यह जानकारी दी।

प्रषेक-
जितेन्द्र शिवहरे
177, इंदिरा एकता नगर पूर्व रिंग रोड चौराहा मुसाखेड़ी इंदौर मध्यप्रदेश मोबाइल नम्बर
8770870151
[email protected]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *