ये कौन चित्रकार है…?
(आनन्द कुमार)
‘तिरंगा से ज्यादा खूबसूरत किसी भी मुल्क का शान नहीं हो सकता’
‘कर ले कोई देश कितनी भी तरक्की, हिंदुस्तान नहीं हो सकता’,
खेत में लहलहाती फसलें, फसलों के बीच में पेड़, पेड़ों के पीछे आकाश में बादलों की सफेद चादर और उन्हीं बादलों के बीच केसरिया रंग में निहारता सूरज, ये सिर्फ तस्वीर नहीं अपने आप में पूरा हिन्दुस्तान है, वास्तव में ये तस्वीर जिसने भी उकेरी है, उसकी जितनी भी तारीफ की जाए कम है। भारत में खींची गई ये तस्वीर मेरे तिरंगे की शान में चार चांद लगा रही है, भले ही हम आपस में नफरतों के बीज बो रहे हैं, लेकिन ये तस्वीर हमें हमारी अंखडता की याद दिला रही है, हमें अनेकता में एकता की पाठ पढ़ा रही है, खेत से लेकर आकाश तक, पौधों से लेकर पेड़ तक, रंगों की रंगत में तिरंगा देश की खुशहाली में ऐसी रंगोली पेश कर रहा हैं, जिसकी जितनी भी तारीफ की जाए कम है। सबसे ज्यादा तो बधाई तो उस व्यक्ति को जिसने इस खूबसूरत लम्हे को अपने कैमरे में कैद कर देश प्रेम के भाव को सोशल मीडिया पर पेश किया है। वास्तव में जब ऐसी तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर होती हैं तो लगता है कि सोशल मीडिया का बनना कितना अच्छा है। लेकिन जब यही सोशल मीडिया मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं का गवाह बनता है, तो दिल दहल जाता है, खैर अच्छा देखने के लिए अच्छा नजरिया भी होना चाहिए, ऐसा प्रयोग करने वालों के नजरिए को पूरा हिन्दुस्तान बार-बार सैल्यूट करता है, जिसने देश प्रेम के भाव को अपने कैमरे में कैद कर हर हिन्दुस्तानी का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है.
इस छायाकार का नाम तो हमें नहीं पता, लेकिन अगर पता चलेगा तो हम जरूर चाहेंगे कि सरकार ऐसी प्रतिभा को सम्मानित कर उनका हौसला बढ़ाए, जय हिंद, हिंद जय भारत
इस फोटो के साथ चंद लाईनें भी मेरे मोबाइल पर आईं थी, जो कुछ इस प्रकार है
जिस देश का झंडा
खुद कुदरत फहराये,
मजाल हैं दुश्मन भी उस देश का
कुछ बिगाड़ पाए।

