सिद्धपीठ हथियाराम मठ पर महा अष्टमी हवन पूजन आज रात में
गाजीपुर। नवरात्रि के आठवें दिन की देवी मां महागौरी हैं। परम कृपालु मां महागौरी कठिन तपस्या कर गौरवर्ण को प्राप्त कर भगवती महागौरी के नाम से सम्पूर्ण विश्व में विख्यात हुई।
भगवती महागौरी की आराधना सभी मनोवांछित को पूर्ण करने वाली और भक्तों को अभय, रूप व सौदर्य प्रदान करने वाली है। अर्थात् शरीर में उत्पन्न नाना प्रकार के विष व्याधियों का अंत कर जीवन को सुख-समृद्धि व आरोग्यता से पूर्ण करती हैं। मां की शास्त्रीय पद्धति से पूजा करने वाले सभी रोगों से मुक्त हो जाते हैं और धन वैभव सम्पन्न होते हैं। उक्त बातें सिद्धपीठ हथियाराम मठ के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनंदन यति जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा।

उन्होंने कहाकि नवरात्रि के सभी दिन देवी पूजन के लिए महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन नवरात्रि की अष्टमी तिथि की रात्रि में महाअष्टमी पूजन के तहत महागौरी देवी का पूजन अर्चन हवन यज्ञ के माध्यम से किया जाता है जो सदियों से चली आ रही परंपरा के तहत महाष्टमी की महानिशा को मंगलवार की रात में सिद्धपीठ हथियाराम मठ में किया जाएगा। बताये कि हालांकि अष्टमी व्रत रहने वाले श्रद्धालु बुधवार को व्रत रहेंगे, क्योंकि अष्टमी की उदया तिथि बुधवार को प्राप्त हो रही है। लेकिन महाष्टमी की महानिशा में पूजन करने वाले श्रद्धालु मंगलवार की रात्रि में ही पूजन करेंगे क्योंकि अष्टमी तिथि की रात्रि मंगलवार की रात्रि में ही पाई जा रही है।
गौरतलब हो कि इस महानिशा में दर्शन पूजन के लिए सिद्धपीठ हथियाराम मठ पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं जो आज रात भर उपस्थित रहकर दर्शन पूजन करेंगे।
महाअष्टमी की रात्रि में देवी पूजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्री यति जी महाराज ने बताया कि अष्टमी को विविध प्रकार से भगवती जगदम्बा का पूजन कर रात्रि को जागरण करते हुए हवन, यज्ञ, अनुष्ठान, भजन, कीर्तन उत्सव मनाना चाहिए तथा नवमी को विविध प्रकार से पूजा-हवन कर नौ कन्याओं को भोजन खिलाना चाहिए और हलुआ आदि प्रसाद वितरित करना चाहिए और पूजन हवन की पूर्णाहुति कर दशमी तिथि को व्रती को व्रत खोलना (पारण करना) चाहिए। यदि नवमी तिथि की वृद्धि हो तो एक नवमी को व्रत कर दूसरे नवमी में अर्थात् दसवें दिन पारण करने का विधान शास्त्रों में मिलता है। जो सभी प्रकार के अमंगल को दूर कर जीवन को सुखद व सुंदर बना देता है।

