शी इज ब्यूटीफुल
“किसी काम के नहीं हो तुम . बस तुम्हें पैसा चाहिए और जगह-जगह घूमने की आजादी . क्या अजीब-अजीब से फोटो ले आते हो तुम .” वह फोटोग्राफर पर चिल्ला रहा था…
“सर ! इस बार मैंने गाँव में जाकर बहुत ही नायाब फोटो निकाले हैं. देखोगे तो दिल खुश हो जाएगा .”
“क्या लाये होंगे गाँव से , नंगे बच्चे , जानवर , चूल्हे या ऐसा ही कुछ . मुझे कुछ हट के चाहिए . लोग अजूबे के पैसे देते हैं …किसी कचरे के नहीं .” वह गिलास की दारू उडेलते हुए बोला .
“बहुत ही खास है ये फोटो . गाँव में रहनेवाली एक बहुत ही प्यारी माँ का है जो अपने बेटे के इंतज़ार में थी . उसकी आँखों की चमक का जो प्यार है उसे केमरे की नजर से नहीं दिल की नजर से देखने की जरुरत होती है . उसकी झुर्रियों में प्यार और आशीर्वादों के ग्रन्थ हैं .”
“ओए! तूने सारा नशा उतार दिया . तेरा फोटो फाड़ के फेंक दे कहीं . मुझे तू मेरी माँ की याद दिला रहा है . भूल जाना चाहता हूँ मैं उसे . अच्छा ये बता कौन-से गाँव गया था ?”
“नूरेवाली गाँव . उसके घर को देख के लगा था जैसे किसी छोटे से बच्चे का इंतज़ार कर रही हो . उस बच्चे की कुछ फोटो लेकर आया हूँ . ये देख .” उसने कुछ फोटो उसके हाथ में रख दिये .
फोटो हाथ में लेते ही जैसे उसे झटका लगा .
“ओए! तू मेरे घर गया था . ये तो मेरे फोटो हैं . ये चाँदी का गिलास माँ लेकर आई थी मेरे लिए कहती थी राहू नहीं रहेगा मुझपर . वो फोटो दिखा मुझे , जो तू बहुत खास बता रहा है .”
सर पे चुन्नी और सलवार कुर्ता पहने एक बुजुर्ग महिला थी . जैसा बताया था ठीक वैसा ही था …इंतज़ार की चमक ….प्यार के अनकहे ग्रन्थ …और अथक इंतज़ार .
“सर ! कुछ दे दो . मैं और बढ़िया फोटो लाउंगा .”
“ओए ! पागल …इस से बढ़िया कोई फोटो हो ही नहीं सकती …ये सचमुच मेरी माँ है ….आज जो दिल करे ले ले ….मैं माँ से मिलने जाऊँगा अपने गाँव. शी इज ब्यूटीफुल ”
और उसने फोटोग्राफर को बाहों में भर चूम लिया .
शब्द मसीहा


अति ह्रदयस्पर्शी सत्यकथा।