मऊ के शरद राय DRDO में वैज्ञानिक के पद पर दे रहे हैं सेवाएं
मऊ जिले को अपने सपूतों पर गर्व है, देश और दुनिया में मऊ के लाल अपनी हुनर से पहचान बना रहे हैं.

आज APNAMAU की टीम आपको मिसाएल-ए-मऊ अभियान के तहत एक और ऐसे ही होनहार से रूबरू कराएगी. जो भारत सरकार के रक्षा एवं अनुसंधान संस्थान की एक लैब में वैज्ञानिक के पद पर सेवाएं दे रहे हैं. और देश के विकास और खुशहाली में अपनी अहम भूमिका और जिम्मेदारियों को निभा रहे हैं.
मऊ के निजामुद्दीन पुरा निवासी शरद कुमार राय एडवोकेट अनील कुमार के पुत्र हैं, और इस समय मध्य प्रदेश के ग्वालियर में DRDO के एक लैब में वैज्ञानिक बी के पद पर कार्यकरत हैं. जिनका माइक्रो बॉयलोजी और वॉयरोलॉजी में स्पेलशलाइजेशन है.
इसके साथ ही वो डीआडीओ से ही अपनी पीएचडी भी पूरी कर रहे हैं ताकि देश के प्रति अपनी भूमिका को और बढ़ा सके.


वो बताते हैं कि वो फिलहाल इमरजिंग वायरस एंड बॉयो थ्रेट एजेंट को लेकर काम कर रहे हैं.
शरद कुमार राय ने आजमगढ़ के एक साधारण स्कूल प्रखर शिशु निकेतन से अपनी शिक्षा की शुरूआत की उसके बाद उन्होंने अमिला के सांता नंद इंटर कॉजेल में 8वीं तक की पढ़ाई पूरी की. और मऊ के ही डीएवी इंटर कॉलेज से साइंस में 12वीं करने के बाद वो बीएसी करने सिबली नेशनल कॉलेज आजमगढ़ पहुंच गएं, और फिर उनके आगे बढ़ते कदम ने पीछे मुड़कर नहीं देखा.
शरद कुमार ने पहले बॉयोटक्नॉलजी में एमएसी की डिग्री ली. और फिर जैम JAM यानि ज्वांइट एडमिशन फॉर एमएसी इन आईआईटी में ऑल इंडिया 33वां रैंक लाकर पूरे देश में अपना नाम रौशन किया.

इस परीक्षा को पास करने के बाद वो आईआईटी जैसी बड़ी संस्था से एमएसी इन बॉयोटेक्नॉलजी करने में कामयाब रहे. अपने मंजिल के प्रति उनकी सच्ची लगन बुलंद हौसले से वो आगे बढ़ते रहें. अब वो डीआरडीओ से ही पीएचडी की पढ़ाई पूरी कर रहे हैं. और यहीं पर वैज्ञानिक के पद पर अपनी सेवाएं भी दे रहे हैं.
यहां उनकी जिम्मेदारी काफी अहम हैं क्योंकि वो इमरजिंग वायरस एंड बॉयो थ्रेट एजेंट पर काम कर रहे हैं. ताकि देश को सुरक्षित और लोगों को खुशहाल रख सकें


वो कहते हैं उनके सपनों का कारवां अभी रूका नहीं है. वो आगे बढ़ते रहेंगे और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाते रहेंगे.
कोरोना काल में शरद कुमार राय ने अपनी ज्ञान का भरपूर इस्तेमाल किया और सोशल मीडिया के माध्यम से वो लोगों खतरनाक कोरोना वायरस से बचने की तरकीब बताते रहे हैं. अपना मऊ की टीम को भी उन्होंने कई बार खुद कॉल करके इस खतरनाक संक्रमण से बचने के उपाय सुझाए हैं.
शरद कुमार मऊ के छात्रों के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं और कहते हैं कि साइंस के क्षेत्र में जो भी युवा आगे बढ़ना चाहता है वो उसकी मदद और उसको रास्ता दिखाने के लिए हमेशा तैयार हैं.
वो बताते हैं कि हर युवा जो साइंस के क्षेत्र में कुछ बड़ा करना चाहता है उसे सबसे पहले अपने लक्ष्य को पहचानना होगा और बुलंद हौसलों के साथ आगे बढ़ना होगा.
वो नाम गिनाते हुए बताते हैं कि टाटा इंस्टिट्यूट, भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर और आईसीआर में काउंसलिंग रिसर्च जैसी कई ऐसी संस्थाएं हैं…जो महज बीएससी और एमसी करने वाले छात्रों को वैज्ञानिक बनने का मौका देती है. इसके अलावा वो बताते हैं इस क्षेत्र में करियर बनाने के तमाम रास्ते हैं. जिसको अपना कर खुद का भविष्य और देश का भविष्य निखारा जा सकता है. वो ये भी बताते हैं कि सपनों को पूरा करे के लिए कभी भी देर नहीं होता और कोई भी काम छोटा नहीं होता….नर्स की भूमिका उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी डॉक्टर की
आईएएस का भी उतना ही योगदान है जितना सिपाही का ऐसे में अपना आखिरी प्रयास करना चाहिए. वो एक उदाहरण देते हुए बताते हैं कि मधु शर्मा जो उनकी एक करीबी हैं….उन्होंने एक छोटे से कॉलेज से बीटेक किया लेकिन आज वो करोड़ों के पैकेज गूगल जैसी विख्यात कंपनी में काम कर रही हैं.
शरद युवाओं को सफलता का मंत्र देते हुए बताते हैं कि…जिंदगी हारने का नाम नहीं है.
अपना मऊ की उनके उज्जवल भविष्य की कामना करती है. अगर आप वैज्ञानिक शरद कुमार राय से कोई सवाल पूछना चाहते हैं तो [email protected] पर मेल कर हमारे जरिए उनसे जानकारी ले सकते हैं. हम आपका पूरा सहयोग करेंगे.

