प्रधानमंत्री मोदी संघीय ढांचे पर चोट न करें : अतुल कुमार अनजान
दिल्ली। भारतीय संविधान निर्माताओं केन्द्र सरकार के -राज्य के संबंधों पर बहुत स्पष्ट निर्देश देकर लिखित संविधान में प्रावधान किए हैं l 70 वर्ष के सफर में यदा-कदा केंद्र राज्य संबंधों में टकराव हुआ है l लेकिन राज्यों के अधिकार क्षेत्र, समवर्ती सूची में केंद्र ने कभी दखलंदाजी नहीं की l प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सात वर्ष के कार्यकाल में केंद्र- राज्य संबंधों के बीज टकराव की एक लंबी फेहरिस्त है l जिसके चलते गंभीर संवैधानिक संकट खड़े हो जाते हैं l राजनीतिक माहौल खराब होता है l उक्त वक्तव्य देते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय सचिव अतुल कुमार “अनजान” ने कहा कि हाल ही में मोदी -ममता विवाद ने एक नई कड़ी खड़ी की है l केंद्र अपने असीमित अधिकारों का दुरुपयोग अगर राज्यों की व्यवस्था को कमजोर करने के लिए करता है तो वह संघीय ढांचे पर हमला करता है l पश्चिम बंगाल के चुनाव में ममता और मोदी के टकराहट की स्थिति सारे देश के लोग जानते हैं l राज्य के मुख्य सचिव 31 मई को सेवा से रिटायर हो रहे हैं l मुख्यमंत्री की सहमति और इच्छा के विरुद्ध केंद्र ने सिर्फ 3 माह का सेवा विस्तार देकर उन्हें केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर बुलाने का आदेश , एक मजाक है l सीधे-सीधे टकराहट का रास्ता खोलता है l कम्युनिस्ट किसान नेता अतुल कुमार “अनजान” ने आगे कहा कि सारे देश के किसान पिछले 6 माह से आंदोलन कर रहे हैं और लाखों किसान दिल्ली के बाहर धरने पर बैठे हैं l उसका मूल कारण यह है कि तीन कृषि कानून बिना राज्यों की सहमति के प्रधानमंत्री ने अपने क्रूर बहुमत से संसद में पारित करा लिया l संविधान के अंतर्गत 61 विषय राज्यों के अंतर्गत आते हैं l जिनमें कृषि सर्वाधिक महत्वपूर्ण विषय है l बिना राज्यों के मुख्यमंत्री के सलाह के 5 जून 2020 को तीन ऑर्डिनेंस लाकर, फिर कानून में बदलना क्या यह सीधे-सीधे संघीय व्यवस्था पर गहरी चोट नहीं है l प्रधानमंत्री को संसदीय लोकतंत्र को और संविधान को मजबूत बनाए रखने के लिए संघीय ढांचे पर चोट नहीं करना चाहिए अन्यथा इससे केंद्र राज्य के बीच गहरे टकराव की स्थिति पैदा होगी l समय की मांग है की प्रधानमंत्री राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक विशेष बैठक करके केंद्र- राज्य संबंधों और संघीय ढांचे पर संविधान के द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुपालन के लिए संयुक्त पहल करें l

