उत्तर प्रदेश

राष्ट्रपति बनने के बाद पहली बार गांव पंहुचे रामनाथ कोविंद, गांव की मिट्टी का किया तिलक,हुए भावुक

गांव की मिट्टी का तिलक लगाते राष्ट्रपति

देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद अपने तीन दिवसीय उत्तर प्रदेश के दौरे पर रविवार का सुबह राष्ट्रपति बनने के करीब चार साल बाद अपने गांव पहुंचे। गांव में बने हेलीपैड पर उतरते ही राष्ट्रपति ने सर्वोत्तम अपनी मातृभूमि को झुक कर नमन् किया और मातृभूमि भूमि की मिट्टी का तिलक लगाया। वहां से वे पथरी देवी मंदिर में पूजन, अर्चन और दर्शन किये। इस दौरान उनकी धर्मपत्नी श्रीमती सविता भी मौजूद रही।
राष्ट्रपति की अगवानी में यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ मौजूद रहे। राष्ट्रपति ने डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा को भी पुष्प अर्पित कर नमन किया।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कानपुर देहात में अपने अभिनंदन समारोह में बोले कि मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मेरे जैसा साधारण परिवार के लड़के को कभी देश के सर्वोच्च पद की जिम्मेदारी निभाने का सौभाग्य मिलेगा। उन्होंने कहा कि लेकिन हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था ने इसे संभव बना दिया। आज इस अवसर पर मैं देश के स्वतंत्रा सेनानियों के बलिदान व संविधान का मसौदा बनाने वाली समिति को उनके योगदान के लिए नमन करता हूं। उन्होंने कहा कि मैं जहां तक पहुंचा हूं इसका श्रेय इस गांव की मिट्टी और आप सभी के प्यार और आशीर्वाद को जाता है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद गांव पहुंचते ही भावुक हो गए। बचपन को याद करते हुए उन्होंने कहा कि गांव की इस मिट्टी और यहां के लोगों के आशीर्वाद की बदौलत वे राष्ट्रपति भवन तक पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि मेरे गांव में जितनी भी आप सभी को है उससे ज्यादा मुझे है। मातृभूमि में आने की उनको बहुत लालसा थी। उन्होंने खूद बताया कि हेलिकाप्टर से नीचे उतरा तो मातृभूमि को चरण स्पर्श किया। और प्रार्थना की कि इस बार गांव आने में जितना विलंब हुआ है आगे नहीं हो फिर फिर जल्दी गांव आने का मौका मिले। उन्होंने गांव को मिट्टी को नमन करते हुए का फोटो तथा गांव की मंदिर में दर्शन पूजन करने का फोटो अपने टि्वटर पेज पर शेयर करते हुए लिखा है कि… In a rare emotional gesture, after landing at the helipad near his village, Paraunkh of Kanpur Dehat district of Uttar Pradesh, President Ram Nath Kovind bowed and touched the soil to pay obeisance to the land of his birth.

जन्मभूमि से जुड़े ऐसे ही आनंद और गौरव को व्यक्त करने के लिए संस्कृत काव्य में कहा गया है:

जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी

अर्थात

जन्म देने वाली माता और जन्मभूमि का गौरव स्वर्ग से भी बढ़कर होता है।

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