प्रगतिशील नया ज़माना आया
@ राजेश कुमार सिंह…
प्रगतिशील नया ज़माना आया।
प्रगति के साथ इंटरनेट को लाया।।
नए लोगों को खूब रिझाया,
सभी तरफ़ अपना जाल फैलाया।
सूचना का नया सबेरा लाया,
लोगों के बीच चुनौती पनपाया।
लोग-बाग कुछ सीख रहे,
कुछ सीखने को जूझ रहे।
कुछ इसके लिए तैयार नहीं,
कहीं इसके लिए सुलभ लोग,
कहीं अलग से लोग नहीं।
हर जगह अपनी समस्याएँ हैं,
बात यह समस्या बढ़ा रही,
बहुतों को उलझा रही।
बदनाम उन्हें करा रही,
प्रगतिशील नया ज़माना आया,
साथ अपने समस्या लाया।।
प्रगति के इस दौर में,
विज्ञान ने विकास लाया,
साथ उसके विनाश लाया।
पश्चिम की प्रगति इसकी तक़रीर लिखी,
साथ हिरोशिमा–नागासाकी की
विनाश-लीला भी दिखी।
प्रगतिशील नया ज़माना आया,
साथ अपने समस्या लाया।।
स्व-हित के इस प्रबल दौर में,
व्यक्ति-देश ने आगे बढ़ने की ठानी है।
इससे सुख-शांति पर चुनौती आनी है,
जिसकी चिंगारी चतुर्दिक दिख रही।
महाद्वीपों में टकराहट चीख रही,
बुद्धि अपना चमत्कार दिखा रही।
ड्रोन–मिसाइल टेक्स की आहट आ रही,
शेयर बाज़ार गिरा रही,
आर्थिक हलचल मचा रही।
कुछ का तो चाँदी है,
शेष हुआ पानी-पानी है।।
तेल भी अपना खेल दिखा रहा,
सबल को उकसा रहा,
कहीं अनर्थ करा रहा,
नित्य समस्या बढ़ा रहा।
सत्ता परिवर्तन करा रहा,
राष्ट्रसंघ को मुख चिढ़ा रहा।
प्रगतिशील नया ज़माना आया,
साथ अपने समस्या लाया।।
पक्ष–विपक्ष तो साथी हैं,
ऐसा होना स्वाभाविक है।
यहाँ कर्ता की प्रबल भूमिका होती है,
चयन वह किसका कर रहा?
किस पथ पर उसका मन मचल रहा,
संघर्ष में क्यों पड़ रहा,
आपस में क्यों लड़ रहा?
प्रगतिशील नया ज़माना आया,
साथ अपने समस्या लाया।।
— राजेश कुमार सिंह
मऊ, उत्तर प्रदेश
📞 9415367382


