हंसना मना है!

हँ बे, का करिहस… बहुत जुल्म बा!

अकबक
आनन्द कुमार

अबे फक्कन मियाँ, आज सुने ह का?
ना रे ढक्कन, का भवा?
अबे नामानिगरवा न, ऊ यादव मंत्री जवन हैन, ऊ आवा रहेन।
ओसे जमके सवाल किएन सब!
अच्छा, ऊ का?
अबे उहे जवन घोसिया में ओकर मोर्या जिलाध्यक्ष हएन, अउर करवा के सनरूफवा खोल के चौधरी के स्वागत में घूमें रहेन।
ओहिपे खूब सवाल पूछेन।
पहिले त मंत्री जी सकपका गएन, फेर बोलेन

कहेन “कार्रवाई होईह, कानून सबके लिए बराबर ह।”

अबे फक्कन, तोहों का कहत है—
नामानिगरवा पूछेन, मंत्री जी बोलेन “बात खतम”, अउर निकल लिएन।
जबकि जानत ह ढक्कन, ऊ मोर्या जी भी ओहिजे बइठे रहेन!

हँ बे फक्कन, सही कहत ह देखा।
मोरा त तेरह ठो चालान कट गवा ह!
अब का करीं, जात हईं साइकिल पर चढ़े!

हँ बे, का करिहस…
बहुत जुल्म बा!

इसे पढ़कर हँसी आए तो ठहाका लगा लें और ग़ुस्सा आए तो ख़ुद पर क़ाबू रखें! कुछ सीख सकें तो सीख लें कृपया शिकायत किसी से ना करें। कानून अपने हिसाब से काम करती है!

 

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