रचनाकार

डिजिटल एहसास

अंजु गुप्ता ✍🏻

इक दौर था
जब उतरते थे एहसास
पन्नों पर…
कभी स्याही, कभी खून
और कभी आंसुओं से!
और उनकी यादें,
रहती थीं ताउम्र संग,
अनमौल खजाने की तरह!
पर आजकल …
बटन दबाते ही
“डिलीट” हो जाते हैं एहसास
और उनके संग – संग
बीती यादें!
सच में आजकल
एहसास भी
… डिजिटल हो चले हैं।

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