प्यार का इन्फेक्शन
पति लेपटॉप पर कुछ काम रहा था कि पत्नी गुस्साती हुई आई और बोली-
“घर में कोई जीये या मरे मगर तुम्हें कोई फ़र्क नहीं पड़ता . लड़का कई दिन से खांस रहा है . दो -तीन दिन से बुखार है मगर तुम किसी अच्छी जगह ले ही नहीं गये .”
“डाक्टर से दवाई ली है न , क्यों इतना परेशान हो रही हो . मौसम बदल रहा है सब ठीक हो जाएगा .”
“तुम्हारे जैसे पत्थर दिल आदमी से ब्याह के मेरे तो भाग ही फोड दिये . कैसा अजीब बाप मिला है ये . जरा चिंता नहीं है इसे औलाद की .”
“मेरे पर्स से पैसे ले लो और अपनी पसन्द के डाक्टर को दिखा दो इसे .”
“तुम्हारे तो पैरों में मेहंदी लगी है . दो घड़ी ये लेपटॉप छूट न जाय हाथ से . कुछ भी कहो तो बस चुप लगा जाते हो . मुँह में जुबान है भी या नहीं !”
“माँ! क्यों तंग कर रही हो पापा को . मेरा हाल-चाल पूछते तो हैं . दवाई ले तो आया हूँ मैं . अब मैं बड़ा हो गया हूँ . बेकार ही पापा को बोलती रहती हो .”
“तू भी इन्हीं के कहे में चल . अपनी जिन्दगी तो खराब कर ही रहे हैंं , तू भी ये ही सीख ले . जा रही हूँ ऊपर …मर इनके के साथ .” और वह गुस्से में ऊपर की मंजिल पर चली गई .
“क्या हुआ पापा ? लेपटॉप पर पानी गिरा दिया ?”
“अरे! नहीं यार ! चश्में का नम्बर बदल गया है . आँख से पानी निकल पड़ा . कुछ नहीं हुआ मुझे .”
“जानता हूँ, आप चुप रह के प्यार करते हैं और माँ चिल्लाकर . माँ तो एक्स रे की सुनकर ही परेशान हो गई थी .इन्फेक्शन है चेस्ट में . ठीक हो जायेगा .पर आप दोनों के प्यार का इन्फेक्शन कभी ठीक न होगा …आई लव यू पापा .”
शब्द मसीहा

