कवि अशोक कुमार यादव को मिला ‘आज के शिरोमणि’ रचनाकार प्रशस्ति पत्र

राजश्री साहित्य अकादमी छत्तीसगढ़ के द्वारा दैनिक प्रतियोगिता दिनांक 28 जुलाई 2022 को आयोजित किया गया। इस अकादमी के संस्थापक राजेन्द्र कुमार पाण्डेय ‘राज’, अध्यक्ष पंकज जोशी,संपादक चमन विश्वकर्मा और सचिव एडमिन ज्योति महाजन है। काव्य प्रतियोगिता में भारत के अन्य राज्यों के कवि एवं कवयित्रियां सम्मिलित हुए। इस प्रतियोगिता में कवि अशोक कुमार यादव, सहायक शिक्षक, शासकीय प्राथमिक शाला दाबो, शिक्षक नगर जिला मुंगेली, छत्तीसगढ़, भारत के द्वारा स्वरचित, मौलिक और अप्रकाशित कविता ‘जीवन युद्ध’ प्रस्तुत किया गया। अकादमी के द्वारा उत्कृष्ट काव्य रचना के लिए कवि को ‘आज के शिरोमणि रचनाकार’ का प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। प्रशस्ति पत्र मिलने पर दोस्तों, परिजनों, कवियों और शिक्षकों ने शुभकामनाएं एवं बधाइयां दी।
कवि- अशोक कुमार यादव मुंगेली, छत्तीसगढ़ (भारत) को इस कविता के लिए मिला यह सम्मान

कविता- जीवन युद्ध
इतना आसान नहीं यहां जीवन जीना,
हर घड़ी घुट-घुट कर मरना पड़ता है।
कभी अपने लिए कभी अपनों के लिए,
कुरुक्षेत्र मन मैदान में लड़ना पड़ता है।।
भटक गया हूं विकराल कंटक वन में,
कई विचित्र आवाज़ सुनाई दे रही मुझे।
डर से कांप रहा है रोम-रोम,बदन अंग,
प्रार्थना कर चीखता पुकार रहा हूं तुझे।।
घनी अंधेरी रात में घिर गया मृत्यु बादल,
पल-पल दे रहा कोई बिजली के झटके।
पीट रहा था बारिश की बूंदे बनकर कोड़े,
तेज हवाएं उड़ते हुए जमीन पर पटके।।
पेड़ों में दिखा प्रेत छाया सफेद कंकाल,
कई अस्त्रों और शस्त्रों को धारण किए।
वार से घायल खून से लथपथ दम तोड़ा,
शिक्षाविद् शामिल अंतिम यात्रा के लिए।।
स्वयं बनकर सर्वश्रेष्ठ धनुर्धारी अर्जुन,
कर्म संशय में घिरा रहता हूं रात-दिन।
कोई कृष्ण बन दो मुझे गीता उपदेश,
कर्तव्यों का बोध हो मैं हो गया खिन्न।।

