खास-मेहमान

सिक्किम केन्द्रीय विश्वविद्यालय के डॉ सुरेन्द्र कुमार निर्भया सेना के भारतीय संस्कृति संवर्द्धन समिति के चेयरमैन बनाए गये

गंगटोक। सिक्किम विश्वविद्यालय गंगटोक के असिस्टेंट प्रोफेसर ( गायन ) डॉ सुरेन्द्र कुमार को निर्भया सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सतीश मिश्र बाबा ने भारतीय संस्कृति संवर्द्धन समिति का चेयरमैन नियुक्त किया है।
डॉ सुरेन्द्र कुमार काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ( BHU ) से संगीत एवं मंच कला संकाय से संगीत से स्नातक व स्नातकोत्तर किये हैं तथा दिल्ली विश्वविद्यालय से संगीत व ललित कला संकाय से एम. फिल , पीएचडी किए हैं। वे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा जूनियर रिसर्च फेलोशिप भी प्राप्त है ।
डॉ सुरेन्द्र सिक्किम विश्वविद्यालय से पहले जोधपुर विश्वविद्यालय में पूर्व संगीत विभागाध्यक्ष भी रहे है ।
डॉ सुरेन्द्र को देश के संगीत के क्षेत्र में दर्जनों बड़े पुरस्कार / सम्मान प्राप्त हुए है।
आपने दिल्ली व मुंबई में पाँच वर्षों तक संगीत निर्देशन का कार्य भी किया है ।
डॉ सुरेन्द्र कुमार मूलतः बिहार की धरती के कैमूर जिले के विश्व प्राचीन मंदिर मुंडेश्वरी धाम मंदिर के पढौती गांव के मूल निवासी है


सतीश मिश्र बाबा ने कहा कि डॉ सुरेन्द्र जैसे सरस्वती पुत्र के सेना से जुड़ने से निःसंदेह सेना राष्ट्रीय स्तर पर विशेष मजबूती प्राप्त करेगी ।
डॉ सुरेन्द्र आज व अभी से आप दृढ़ संकल्पित मन से सेना की प्रगति के निमित्त जी जान से लग जाएं ।
डॉ सुरेन्द्र की नियुक्ति पर निर्भया सेना के आदर्श संरक्षक तुल्य मार्गदर्शक मंडल से अति वरिष्ठ सदस्य सर्वप्रथम प्रोफेसर श्री प्रकाश मणि त्रिपाठी ( गुरु जी ) कुलपति इंदिरा गाँधी ट्राइबल यूनिवर्सिटी, अमरकंटक , अनूपपुर , मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के दर्जनों प्रोफेसर गण , दर्जनों भारतीय रेल के वरिष्ठ रेल अधिकारी गण व सेना के सभी सम्मानित चेयरमैन तथा सेना के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी विशेष खुशी जाहिर की है व खास तौर से कैमूर जिले में विशेष हर्ष है ।

  • निर्भया सेना का देश का सबसे बड़ा राष्ट्रीय कार्यालय बिहार के कैमूर जिले के लोदीपुर में स्थित है व निर्माणाधीन है। साथ ही दूसरा सेना का सबसे बड़ा कार्यालय निर्भया सेना की जन्मस्थली व भगवान श्रीराम के पुत्र लव कुश की जन्मस्थली उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में है ।
    आप जैसे संगीत के क्षेत्र में मर्मज्ञ महारथ रखने वाले सरस्वती पुत्र को ” चेयरमैन – भारतीय संस्कृति संवर्द्धन समिति ” नियुक्त करते मुझे विशेष प्रसन्नता की अनुभूति हो रही है ।
    उम्मीद है आप इस पद दायित्व से माँ भारती व भारत की संस्कृति के संवर्द्धन में अपना असीम व अगाध सहभागिता प्रदान कर हजारों भारतीय संस्कृति के रक्षकों को सेना से जोड़ेंगे ।
    जिस ओर जवानी चलती है उस ओर जमाना चलता है

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