भाजपा के “चौधरी” की पहली अग्निपरीक्षा घोसी में !
@ आनन्द कुमार…
राजनीति में चौधराहट का बड़ा मतलब होता है। और जब नाम में ही चौधरी लगा हो, काम भी राजनीतिक हो, व्यापार में भी चौधरी हो, और देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष (चौधरी) बना दिया जाए—तो जिम्मेदारी अपने आप बढ़ जाती है।
यह बात भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष और केंद्र सरकार में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी पर बिल्कुल सटीक बैठती है।
भारतीय जनता पार्टी किसी को भी बड़ा दायित्व सौंपने से पहले गहन विचार और रणनीति करती है। ऐसे में सात बार के महराजगंज सांसद पंकज चौधरी को यूपी की कमान सौंपकर पार्टी ने एक साथ कई राजनीतिक दांव खेले हैं। यह केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूर्वांचल की राजनीति में भी अहम कदम माना जा रहा है।
अब सवाल यह है कि जिले की चौधराहट से निकलकर पंकज चौधरी पूर्वांचल और यूपी की राजनीति में कितने कारगर साबित होंगे। उनकी पहली परीक्षा मऊ जनपद की घोसी विधानसभा में संभावित उपचुनाव में होगी।
घोसी में उपचुनाव में उनके समाज का प्रभावी वोट है। पिछली बार भाजपा को यहां करारी हार मिली थी, लेकिन इस बार पूर्वांचल से आने वाले पंकज चौधरी पार्टी की सियासी स्थिति में कितनी राहत ला पाते हैं, यह देखना बाकी है।
साथ ही यह भी देखना होगा कि वे सपा मुखिया अखिलेश यादव के PDA समीकरण को कितनी मजबूती से भेद पाते हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में विभिन्न लोकसभा में कुर्मी समाज के सपा के सात सांसद भाजपा के खिलाफ जीते थे और भाजपा की नींव हिला चुके हैं।
भाजपा 2027 में कोई गलती दोहराना नहीं चाहती। ऐसे में नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की पहली अग्निपरीक्षा घोसी चुनाव में होगी। यह तय करेगा कि चौधरी की चौधराहट पास होती है या फेल।

