अपना जिलामऊ का इतिहास

मऊ के ऐतिहासिक भरत मिलाप में चारों भईयन का मिलन होते ही श्रद्धालुओं की आंखें हुई नम्

■ मस्जिद से अजान की सदा बुलंद हुई तो इधर हर-हर महादेव के नारों से गूंजा जनपद

मऊ। मऊ जनपद का ऐतिहासिक भरत मिलाप आपसी सौहार्द के बीच सकुशल सम्पन्न हो गया। सूर्य के उदय के साथ प्रभु भगवान श्रीराम का विमान जैसे ही शाही मस्जिद के मुख्य द्वार पर पहुँचा तो वहाँ मौजूद श्रद्धालु हर-हर महादेव व जय श्रीराम का नारा लगाना शुरू कर दिए। प्रभु श्रीराम के आयोध्या में आने की ख़बर जैसे ही हनुमान को होती है तो वह भागते हुए आयोध्या पहुँचते है और भरत से इस बात की जानकारी देते है। यह सुनते ही भरत खुशी से झूम उठते है। इसके बाद भरत प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण व सीता की आगमन की तैयारी में जुट जाते है। अयोध्या पहुँचते ही चारो भाई गले से लिपट जाते है। चारों भाइयों का मिलन होते ही वहां पर मौजूद श्रोताओ की आंखे नम हो गई।कई साल पहले मुगलकाल में जहांआरा के समय से शुरू हुआ मऊ का भरत मिलाप गंगा-जमुनी तहजीब की एक खूबसूरत मिसाल है। मऊ की यह परंपरा देख लोग दांतो तले अंगुली दबा लेते है। हर साल नगर के शाही कटरा के मैदान में भरत मिलाप का आयोजन किया जाता है। बुधवार की रात लगभग 12 बजे राम, लक्ष्मण, सीता का विमान जैसे ही शाही कटरा के मैदान में पहुचता है वैसे ही हर-हर महादेव  व जय श्रीराम के नारों से जनपद गूंज उठता है। उसके बाद राम के पुष्प विमान को शाही कटरा मस्जिद के चैनल गेट से तीन बार स्पर्ष कराया गया। विमान के आगे नारदीय गीत गाते हुए आगे चल रहे थे।

जैसे ही सुबह मस्जिद से अजान की सदा बुलंद हुई और इधर हर-हर महादेव और जय श्रीराम नारा श्रोताओ ने लगाना शुरु कर दिया। राम और रहीम दोनों को एक साथ पुकारने की जो परंपरा बना है वह शांति और सौहार्द्र का सुर है। यही सुर मऊ के लोगों को हमेशा शांति देने का काम करती है।

कमेटी संरक्षक भरत लाल राही ने बताया कि यह ऐतिहासिक भरत मिलाप है यहां पर जब तक अजान और और हर हर महादेव के स्वरो का मिलन न हो भरत मिलाप पूरा नहीं होता। राम-रहीम के मिलन होने के बाद ही भरत मिलाप की प्रक्रिया सम्पन्न करायी जाती है। यहां पर भरत मिलाप पहले होता था, लेकिन इस तरह से अद्भुत मिलन की सोच को जहांआरा बेगम ने शुरु कराया। शाही मस्जिद कटरा के मैदान में जहांआरा बेगम खुद बैठकर भरत मिलाप की इस नयनाभिराम झांकी का लुत्फ उठातीं। इसकी सराहना भी करतीं। कहा कि बीच में यहां दंगा हुआ पर उससे भी इस गंगा-जमुनी तहजीब वाले भरत मिलाप पर असर नहीं पड़ा। सबकुछ ठीक हो गया। भरत मिलाप देखने के लिये लोगो बधाईयाँ दी साथ ही कहा कि इस भरत मिलाप की जो परम्परा है और मऊ की गंगा जमुनी तहजीब है, सहयोग और समन्यव की संस्कृति है वह वेमिशाल है। भरत मिलाप को सकुशल संपन्न कराने के लिए भारी संख्या के आरएएफ व पुलिस बल की तैनाती की गई थी।

 

 

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