मानवता की ज़िंदा मिसाल : विश्वकर्मा विशाल
● अखबार का कोना : आज हिन्दी दैनिक
■अपना ब्लड देकर दूसरे की बचाई जान
■ विशाल के कार्य से भाव विभोर हुआ अंसार का परिवार
(शन्नू आज़मी )

घोसी (मऊ)। मत बेवजह किसी को रुलाने की बात कर, आंसू किसी के पोंछ हसाने की बात कर, गर है सुकून जलने जलाने की बात में,
नफ़रत के जंगलों को जलाने की बात कर।
देश मे मुट्ठी भर लोग टीवी चैनलों पर बहस कर चाहे जितनी भी सांप्रदायिक बयार बहाने की कोशिश कर लें। लेकिन देश की आबादी का एक बड़ा तबका इन तमाम साम्प्रदायिक बयारों की परवाह किये बगैर मानवता को सबसे बड़ा धर्म मानते हुए मानव सेवा के प्रति दृढ़ प्रतिज्ञ होकर उक्त शेर की पंक्तियों को चरितार्थ कर रहा है । इस मानव सेवा की ताज़ा मिसाल पेश की है, अपनी माटी के लाल विशाल विश्वकर्मा ने।
मिली जानकारी के अनुसार नगर के नवजीवन हॉस्पिटल में नगर के ही कस्बा खास मुहल्ले के अंसार अहमद की पत्नी की डिलीवरी ऑपरेशन द्वारा होनी थी और उन्हें ऑपरेशन थियेटर में रखा गया था। तभी अचानक से डॉक्टर द्वारा एक यूनिट ब्लड की मांग की गई। इस वैश्विक महामारी के चलते परिवार के तमाम सदस्य इधर उधर फंसे हुए हैं, जिस कारण परिजनों को काफी दिक्कतें होने लगी। किसी तरह अंसार अहमद के छोटे भाई और ब्लड डोनेट करने वाले एक व्यक्ति आनन -फानन मऊ के लिये रवाना हुए। मऊ पहुंचने पर पता चला कि ब्लड डोनेट करने वाले का ब्लड मैच नहीं कर रहा है और उनको टाइफाइड है। अब अंसार अहमद के सर पर संकट के बादल छाने लगे। उनके इस संकट की घड़ी को सुनकर घोसी नगर के समाजसेवी आक़िब सिद्दीकी भी हॉस्पिटल पहुंचे और अंसार अहमद की तकलीफों को सुनने के बाद उन्होंने एक वाट्सअप ग्रुप में एक यूनिट A+ ब्लड की आवश्यकता है की सूचना डाली। ग्रुप में सूचना पड़ते ही रोटी बैंक चला रहे अभिषेक मद्धेशिया ने एक फरिश्ते के रूप में अपनी संस्था के सदस्य मऊ नगर के मुंशीपुरा निवासी विशाल विश्वकर्मा को सूचना दी और विशाल विश्वकर्मा स्वयं चलकर हॉस्पिटल आये और एक यूनिट ब्लड डोनेट किया और जच्चा बच्चा को अपनी शुभकामनाएं देते हुए घर चले गए। विशाल के इस पुनीत कार्य से अंसार अहमद का पूरा परिवार भावुक हो उठा और उनकी आँखों से बहते हुए आंसुओं से विशाल के लिए इस पाक रमज़ान माह में ढेर सारी दुआएं निकल रही थी।
विशाल विश्वकर्मा मऊ में चल रहे रोटी बैंक के एक सक्रिय सदस्य हैं और मानव सेवा का जज़्बा उनमें कूट कूट कर भरा है। जिसका उदाहरण उन्होंने अंसार अहमद के परिजनों के साथ करके दिखाया। उक्त रोटी बैंक अब ज़रूरतमन्दों को रोटी के साथ- साथ ब्लड बैंक के नाम से ब्लड भी उपलब्ध करा रहा है।
निश्चित ही विशाल ने ये कार्य कर मानव धर्म को सबसे बड़ा धर्म बताते हुए साम्प्रदायिक आधार पर आपसी सौहार्द व भाईचारा तोड़ने वालों को आईना दिखाने का काम किया है।


