कहानी- अरे सुशीला आजकल तुम बहुत खुश नजर आ रही हो क्या बात है?
कहानी का नाम – ‘मानसिकता’
एक दिन दो पुरानी सहेलियाँ आपस में मिली एक दूसरे का हालचाल पूछने लगी एक ने कहा -“अरे सुशीला आजकल तुम बहुत खुश नजर आ रही हो क्या बात है ।”
दूसरी ने कहा-“बात ही खुशी की है प्रमिला कल ही बेटी का फोन आया था बड़े मजे से है वह। दामाद बहुत बढ़िया मिला है । निर्मला को बहुत मानता है ,जो कहती है वही करता है । हमेशा उसे हाथों पे लिए रहता है ,घूमना फिरना शॉपिंग करना सब निर्मला की मर्जी से ही होता है। दामाद नहीं हीरा है हीरा । बड़े भाग्य से से ऐसा दामाद मिलता है ।”
अरे वाह ! ये तो बड़ी खुशी की बात है । भगवान करे सबको ऐसा ही दामाद मिले ।”
उसकी हां में हां मिलाते हुए प्रमिला बोली ।
कई दिन बाद दोनों फिर मिलती हैं ।
“अरे सुशीला आजकल तुम बहुत उदास दिख रही हो क्या बात है? बहू से कुछ खटपट है क्या ? क्या तुम्हारी सेवा सुश्रूषा नहीं करती ? “
प्रमिला ने एक साथ कई सवाल पूछ डाले।
लंबी सांस लेते हुए सुशीला बोली ” क्या बताऊँ प्रमिला बेटा निकम्मा निकला । बहू जो कहती है वही करता है । जब अपना ही सोना खोटा निकला तो दूसरे की क्या कहे । यहां-वहां घूमते रहते हैं शॉपिंग करते हैं रात का खाना होटल में खा कर आते हैं । बहु कहती है ‘ मां जी मैं बहुत थक गई हूं खाना बनाने के लिए मन नहीं करता है । दीपक भी उसी की हां में हां मिलाता है ।”
“कभी-कभी तो ऐसे ही सो जाती हूँ यह कह कर कि मुझे भी आज खाने का मन नहीं करता है ।भूख नहीं है कभी मन नहीं मानता तो दो रोटी बना लेते हो दोनों प्राणी के लिए । बहू नहीं ये तो जादूगरनी है ,बेटे पर जादू कर दिया है । बेटा गया हाथ से ।”
प्रमिला कुछ बोल ना सकी । सर पर हाथ रख कर सोचने को बाध्य हो गई कि जब कोई काम अपनी बेटी करती है तो ठीक है ।अगर वही काम दूसरे की बेटी (बहू )करती है तो वह जादूगरनी हो गई । दमाद बेटी के साथ अच्छा व्यवहार करता है तो दमाद हीरा है नेक है । वही कोई काम बेटा बहू के साथ करता है तो वह निकम्मा गया हाथ से कहलाता है । यह हम औरतों की दोहरी मानसिकता क्यों ?
कहानी के लेखक- श्री दिनेश चंद प्रसाद” दिनेश” कलकत्ता
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