कृषि विज्ञान केंद्र, पिलखी, मऊ में चने के बीज का हुआ निःशुल्क वितरण
मऊ। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय अअकुमारगंज अयोध्या द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र, पिलखी, मऊ पर समूहबद्ध अग्रिम पंक्तिप्रदर्शन दलहन (सीएफएलडी-दलहन) योजनान्तर्गत 100 किसानों को 20 हेक्टेयर क्षेत्रफल पर बुवाई हेतु चने का बीज प्रजाति आरवीजी- 203 का नि:शुल्क बीज वितरण किया गया। चने की यह प्रजाति राजमाता विजयराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर से संबंद्ध आएके कालेज, सिहोर, से विकसित हुई है। इसकी मुख्य विशेषता 90-120 दिन में पककर तैयार हो जाती है। यह प्रजाति बाॅझपन, मोजैक एवं उकठा की अवरोधी है। यह पाला के प्रति सहनशील है।
कृषि विज्ञान केन्द्र, पिलखी, मऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डा. एल सी वर्मा ने बताया कि अच्छी पैदावार प्राप्त करने के लिए पंक्ति से पंक्ति की दूरी 30 सेमी एवं पौध से पौध की दूरी 10 सेमी रखना पर्याप्त होता है। बीज की बुवाई लाइन में सीड ड्रिल या सुपर सीडर से करनी चाहिए।
सस्य वैज्ञानिक डॉक्टर अंगद प्रसाद ने बताया कि बुवाई के 72 घंटे के अंदर प्रीइमरजेंस खरपतवारनाशी दवा पेंडामेथिलिन की मात्रा 3.3 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर छिड़काव करें। अच्छा उत्पादन प्राप्त करने के लिए बुवाई के 30-40 दिन के अंदर चने की खुटाई करने शाखाओं की संख्या में बढ़ोत्तरी होती है।
बीज प्रौद्योगिकी वैज्ञानिक डा. हिमांशु राय ने बताया कि यह आधारीय बीज है। बुवाई के लिए प्रति हेक्टेयर 60 किलोग्राम बीज का प्रयोग किया जाता है। आधारीय बीज होने के कारण किसान अगले साल इसका प्रयोग बीज के लिए भी कर सकते हैं। पौध सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. लाल पंकज सिंह ने बताया कि बुवाई से पूर्व बीज शोधन अवश्य करें जिसके लिए बाविस्टिन या थीरम की 2.5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज के लिए पर्याप्त है। उकठा बीमारी को रोकने के लिए 10 ग्राम ट्राइकोडर्मा प्रति किलोग्राम बीज से शोधित करने के उपरांत बुवाई करना चाहिए। उद्यान वैज्ञानिक डा. जे.के. कुशवाहा ने बताया कि दाल प्रोटीन का मुख्य स्रोत है यह बच्चों में कुपोषण को दूर करता है। मृदा वैज्ञानिक डॉक्टर चंदन सिंह ने बताया की मिट्टी की जांच कराकर बीज को राइजोबियम कल्चर से शोधित कर बुवाई करें।
लाभान्वित होने वाले किसानों में मांधाता सिंह, मधुसूदन सिंह, यशवंत सिंह, संजय सिंह, सुखनंदन, अनिल सिंह, सीमा सिंह, लक्ष्मण, साहेब चौहान, भोला यादव, केदारनाथ, उदय प्रताप सिंह, राम मदन सिंह एवं प्रियंका सिंह सहित 150 किसानों ने प्रतिभाग किया।


