कविता : मधु राय “चेतावनी”
सीमा पार के दो दुश्मनों को कवयित्री के शब्दों में चेतावनी…
आगे बढ कर हाथ मिलाना हमको आता है
सुन्दरतम सम्बन्ध निभाना हमको आता है ,
जियो और जीने दो का सिद्धान्त अटल अपना
श्रेय विश्व वन्धुत्व सिखाना हमको आता है ।
पलकों के पाँवड़े बिछाना हमको आता है
स्वागत में पंखुड़ी बिखराना हमको आता है,
वही शठे प्रति शाठ्यम का भी पाठ पढ़ा हमने,
कॉटो की भी सेज सजाना हमको आता है।
अन्यायी को न्याय सिखाना हमको आता है,
सच्चाई की राह दिखाना हमको आता है,
भाई भी धर्मांन्ध आततायी यदि हो जाये तो
कुरु क्षेत्र का युद्ध रचाना हमको आता है ।।



