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स्मृति विशेष : कपिल देव यादव राजनीति के थे धुरंधर खिलाड़ी

गांव की पंचायत से विधानसभा में दस्तक देने वाले स्व. कपिल देव यादव राजनीति के थे धुरंधर खिलाड़ी

( आनन्द कुमार )

मऊ। पूर्व विधायक स्व. कपिल देव यादव की आज 8वीं पूण्यतिथि है। राजनीति के मजे खिलाड़ी के रुप में जब कपिल देव यादव ने राजनीति हेतु जमीं पर पावं उतारा तो फिर रुकने का नाम नहीं लिया। गांव की सबसे छोटी पंचायत से लेकर प्रदेश की सबसे बड़ी सदन तक पंहुचने बाले कपिलदेव यादव ने राजनीति में पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर के खिलाफ भी बसपा के हाथी पर सवार होकर दमदारी से चुनाव लड़े लेकिन उन्हें पराजय हाथ लगा।जनपद से सटे इंदारा के छोटे से गांव में सन 1944 में जन्मे कपिल देव यादव शुरू से ही सामाजिक व राजनीतिक गतिविधियों में लगे रहे। वे जनपद में शिक्षा के विकास के साथ-साथ राजनैतिक सरोकारों में पूरी ईमानदारी से लगे रहे। अपने राजनैतिक शुरूआत में कपिलदेव यादव इन्दारा ग्राम सभा से सात बार लगातार स्वयं व इसकेे अलावा परिवार जन को प्रधान बनाने का गौरव प्राप्त किए। इसके अलावा एक बार जिला पंचायत सदस्य के रूप में कार्य किए। इसके अलावा कपिल देव यादव ने अपनी पुत्रवधु सुमित्रा यादव को कोपागंज ब्लाक के प्रमुख पद पर भी आसीन कराने में सफलता प्राप्त की थी। कपिलदेव यादव का राजनीतिक सफर गांव की सदन से शुरु हुआ तो सीधे 2002 में पहली बार नत्थूपुर से बसपा विधायक के रुप में प्रदेश की सबसे बड़ी पंचायत विधानसभा में दस्तक दी। बसपा से से विधायक बनने के बाद बसपा सरकार में उनकी छवि साफ सुथरी होने के कारण बसपा की नेत्री मायावती ने उनके प्रति आस्था व्यक्त करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर के खिलाफ बलिया लोकसभा से बसपा का प्रत्याशी घोषित किया। मायावती के इस घोषणा के बाद से कपिलदेव यादव की चर्चा राष्ट्रीय राजनीति के पटल पर होने लगी। उन्होंने पूरी दमदारी के साथ हाथी की सवारी करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री चंदशेखर के खिलाफ राजनीतिक पारी खेली वैसे तो यह चुनाव कपिलदेव यादव हार गए लेकिन उनका चंद्रशेखर के खिलाफ चुनाव लड़ना ही उनके राजनैतिक कद को काफी बढ़ा दिया।

उसके बाद यूपी के 2007 में होने बाले के विधान सभा में बसपा से टिकट न मिलने पर नाराज होकर कपिलदेव यादव सपा में शामिल हो गये। फिर समाजवादी पार्टी ने इनको 2007 में घोसी विधान सभा से अपना प्रत्याशी बनाया। लेकिन वहां भी वे कुछ मतों से चुना हार गये। तब से ये समाजवादी पार्टी में राजनीतिक सफर किये, तथा शिक्षा के क्षेत्र में मऊ में प्रथम विधि महाविद्यालय, इण्टर कॉलेज, डिग्री कॉलेज, जूनियर हाईस्कूल तथा अन्य शिक्षण संस्थानों का ये प्रबन्धक रहे। 4 जूलाई 2010 को मऊ के मझवारा मोड़ के पास बदमाशों ने कपिलदेव यादव की गोली मार कर हत्या कर दी। जहां घटना स्थल पर ही वे दम तोड़ दिये। पूर्व विधायक स्वर्गीय कपिल देव यादव की आठवीं पुण्यतिथि पर उनके परिजन, शुभचिंतक व समाजवादी पार्टी के लोग अपने नेता को याद कर श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

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