रचनाकार

तू वो लिख जो, बिना हर्फ तमाम बातें पढ़ लें कोई…

शब्द मेरे मीत…
डा. महिमा सिंह

किसी की तमाम बातें बेमतलब सी…!!
किसी की तमाम ख़ामोशियाँ क़हर है…!!!!
तू लिख सारी बातें तमाम
मगर ख़ामोश रहकर !!
तू लिख तमाम शिकायतें अपनी
मगर मुस्कुरा कर, ख़ामोश रहकर!!
मैं पढ़ू तमाम कोशिशें कर के
मगर नयन बंद करके।
तुम आना जरुर मगर ख़ामोशी से,
हम नींद में तेरे ही ख्वाबों में गुम हैं
तुम आना जरुर मगर
महिमा के ख्वाबों की
हसीन तदबीर बनके।।

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