हे बाबू ! चीन क, समान जनि लिहअ

धीरु भाई (धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव)

हे बाबू! चीन क,
समान जनि लिहअ।
हे भैया! चीन क,
समान जनि लिहअ।

दुश्मन से कीन,
अपमान जनि लिहअ।
हे बाबू! चीन क,
समान जनि लिहअ।
हे भैया! चीन क,
समान जनि लिहअ।

तोहरा के बाटे,
शहादत क किरीया।
पूजा क किरीया,
इबादत क किरीया।
अपने से आपन,
परान जनि लिहअ।

हे बाबू! चीन क,
समान जनि लिहअ।
हे भैया! चीन क,
समान जनि लिहअ।

हमरा हिमालय पर,
सेना जमा के।
हमहीं के मारत बा,
हमसे कमा के।
एकरा के सबक,
सिखावे के खातिर,
एकर बनावल,
बिहान जनि लिहअ।

हे बाबू! चीन क,
समान जिन लिहअ।
हे भैया! चीन क,
समान जिन लिहअ।

झालर जनि लिहअ,
मत लिहअ मोबाइल।
जनि लिहअ चीन क,
कपड़ा सियाइल।
बबुआ क कहला पर,
बुचिया क कहला पर,
जानके खिलौना,
शैतान जनि लिहअ।

हे बाबू! चीन क,
समान जनि लिहअ।
हे भैया! चीन क,
समान जनि लिहअ।

खाला चमगादड़,
या कीरा व बिच्छू भी।
चाउमीन मेमोज
कुक्कुर व उल्लू भी।
येकरा से जिनगी,
बचावे के खातिर,
येकर बनल,
पकवान जनि लिहअ।

हे भैया! चीन क,
समान जनि लिहअ।
दुश्मन से कीन,
अपमान जनि लिहअ।
हे बाबू! चीन क,
समान जनि लिहअ।

  • धीरु भाई ( धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव )
    सम्पादक,
    राष्ट्रपुरुष चन्द्रशेखर सन्सद में दो टूक,
    लोकबन्धु राजनारायण विचार पथ एक,
    अभी उम्मीद ज़िन्दा है )

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