चर्चा में

दलदल बनी सड़क के बीच मौनी बाबा ने लगाया चौकी, बैठे अनशन पर

(अभिषेक सिंह नीरज/आनन्द कुमार)

आजमगढ़। सावन मास के समय अगर कोई साधु संत, महात्मा, आम जनता की समस्याओं के समाधान के लिए  व्रत की बजाय हठ कर बैठा हो तो यह शासन और प्रशासन के लिए ठीक नहीं है। वह भी उस समय जब प्रदेश में खूद एक मठ के महंत की सरकार हो। लोग सावन माह में पूजन-अर्चन में लगे हैं तो उसी बीच सावन के दूसरे सोमवार को एक साधु जनहित की समस्याओं के लिए, आवागमन के लिए अच्छी सड़क के लिए आने जाने के रास्ते के लिए बीच सड़क पर चौकी लगा कर व्रत की जगह हठ पर बैठा हुआ हो तो यह सरकार की किरकिरी  अलावा कुछ नहीं है। भले ही प्रशासन और शासन इस सड़क को देख अपनी आंखें मूंद लिया हो लेकिन दलदल बने सड़क के बीच चौकी लगाकर बैठा यह संत सरकार को आईना व रास्ता दोनों दिखा रहा है।

आजमगढ़ जनपद के जहानागंज स्थित दौलताबाद गांव के पास सूर्य मंदिर के पास दलदल में तब्दील सड़क की तस्वीर देख कर आप सब कुछ सहज अंदाजा लगा सकते हैं। ग्रामीणों द्वारा कई बार स्थानीय अधिकारियों से लेकर मुख्यमंत्री के पोर्टल पर इस सड़क की व्यथा की लिखित शिकायत की जा चुकी है। लेकिन आंख बंद कर कुंभकर्णी निद्रा में सोए प्रशासन व शासन को जनता की समस्याओं का कोई फीक्र नहीं। जब सरकार व प्रशासन की इस दुर्व्यवस्था को देखकर निद्रा भंग नहीं हुई तो अंत में हार कर वहां पर मौजूद मौनी बाबा ने सरकार को आईना दिखाने की कोशिश की और वह दलदल बनी सड़क में बीच में चौकी रख उस पर बैठ गए। उनके चौकी रखकर दलदल बनी सड़क में बैठते ही यह खबर तेजी से वायरल होने लगी।

लोगों का कहना है कि इस सड़क से आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं लोग घायल होकर शारीरिक और आर्थिक नुकसान सहते हैं लेकिन सरकार को जरा सा भी शर्म नहीं है। एक व्यक्ति मौन व्रत ध्यान धारण करके भगवान की साधना में लीन है वह बोलते नहीं है लेकिन मौन व्रत यह बाबा ने अपनी बंद जुबान से सरकार के कानों में शब्दों का वह घोल डाला है कि अगर सरकार व प्रशासन बाबा के दर्द की आवाज नहीं सुनती है तो फिर ऐसी सरकार और ऐसी प्रशासन किसकी सुनेगी यह बहुत बड़ा प्रश्न है। मौनी बाबा के साथ स्थानिय लोगों ने भी उक्त दलदल वाले मार्ग को जाम कर अपना विरोध प्रदर्शन किया। बाद में मामले की गम्भीरता देख स्थानीय पुलिस प्रशासन ने मौनी बाबा के हठ को अनुनय, विनय निवेदन कर अनशन समाप्त कराया।

 

आम जनता के लिए बाबा ने जो यह कदम उठाया है भले यह सरकार को नागवार ना लगे लेकिन इस सावन माह में एक मौनी बाबा द्वारा दलदल बनी सड़क में सरकार को आईना दिखाने के लिए अगर यह प्रयास किया गया है तो यह प्रयास सफल होता है या असफल यह तो शासन-प्रशासन जाने, लेकिन हठी बाबा का दर्द अगर सरकार व प्रशासन के कानों में नहीं जाता है, इस तस्वीर को देखने के बाद वह नहीं जागते हैं तो यह उनके लिए शोभनीय नहीं है।
लोगों का कहना है कि बेशर्म व्यवस्थापकों के आचरण ने आज एक मौनी को बगावत करने पर विवश कर दिया है। उनका कहना है कि कहाँ है जनता के मसीहा, प्रतिनिधि, धर्म के ठेकेदार, जिम्मेदार अधिकारी आखिर मौन क्यों हैं। स्थानिय लोगों में अजय गिरी, सोनू, शिम्पू, विपुल, रत्नेश अरुण वीरेंद्र दीपक राजविजय, हरेंद्र आदि ने शासन प्रशासन से अबिलम्ब इस नरक से मुक्ति दिलाने की मांग की है।

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