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जयबहादुर सिंह पढ़ाई छोड़कर देश के स्वतंत्रता आन्दोलन में कूद पड़े : अंजान

मऊ। स्वतंत्रता आन्दोलन के महान योद्धा प्रख्यात कम्युनिस्ट नेता एवं भूतपूर्व सांसद जहिदे उर्दू का0 जयबहादुर सिंह की पुण्य तिथि वृहस्पतिवार को कलेक्ट्रट में स्थित प्रतिमा पास भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के तत्वाधान में एक विशाल श्रद्धांजली सभा करके मनायी गयी। जिसमें दिवंगत नेता के जीवन और कारनामों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।
श्रद्धाजलि सभा की अध्यक्षता भाकपा के राष्ट्रीय परिषद के सदस्य पूर्व विधायक का0 इम्तेयाज अहमद नें की तथा संचालन नगर पालिका परिषद के सदस्य का0 फकरे आलम पप्पू ने की। सभा में जनपद के सभी भागों से आये किसानों और मजदूरों ने भारी संख्या में भाग लिया।
सभा को सम्बोधित करते हुए भाकपा के केन्द्रीय सचिव मण्डल के सदस्य एवं अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव का0 अतुल कुमार अंजान ने कहा कि का0 जयबहादुर सिंह का पूरा जीवन संघर्षों में बीता। वे जीवन में पढ़ाई छोड़कर देश के स्वतंत्रता आन्दोलन में कूद पड़े जिसमें उन्हे 8 साल की लम्बी सजा हुयी। जेल से छूटने के बाद वे कम्यूनिस्ट पार्टी में शामिल होकर स्वतंत्र भारत में प्रदेश स्तर पर किसानों को संगठित कर जमीदारी व्यवस्था के खिलाफ लम्बा संघर्ष किया तथा 1967 के चुनाव में वह घोसी लोकसभा के सदस्य चुने गये । उनके जीवन के बहादुरी भरे कारनामें आज भी नौजवानों को प्रेरणा देते हैं। उन्होने कहा कि जिस आजादी एवं सम्पन्नता दिलाने के लिये उन्होने आजीवन संघर्ष किया। आज वह सभी चीजें दॉव पर लगी हुयी हैं। मौजूदा एन0डी0ए0 सरकार की नीतियों के कारण आज देश का किसान सबसे बड़े संकट से गुजर रहा है। किसानों की न तो उपज का लाभकारी मूल्य मिल रहा है और न तो उनके कर्जें ही मॉफ किये गये। कर्ज में डूबे किसानों की आत्महत्याएं बढ़ती जा रही है। पिछले 4 सालों के शासन में भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी द्वारा चुनाव पूर्व जो भी वादे किये गये उनमें से कोई भी वादा पूरा नही हुआ ।
श्रद्धाजलि सभा को सम्बोधित करते हुए भाकपा के जिला सचिव का0 रामसोच यादव ने कहा कि दिवंगत नेता का0 जयबहादुर सिंह नें 1946 में ब्रिटिश सरकार की जेल से रिहाई के बाद अपना पूरा जीवन किसानों और मजदूरों को शोषण से मुक्ति दिलाने में लगाया। उन्हे सच्ची श्रद्धाजलि यह होगी कि हम उनके पदचिन्हों पर चलकर सरकार की विनाशकारी किसान एवं जनविरोधी नीतियों का विरोध करें ।
श्रद्धांजलि सभा में अपने विचार व्यक्त करते हुए वरिष्ठ काम्यूनिस्ट नेता एवं पूर्व विधायक इम्तेयाज अहमद ने कहा कि केन्द्र की वर्तमान सरकार नें अपने चार वर्षों के कार्यकाल में पूरा समय देश के बड़े कारपोरेट पूॅजीपतियों की सेवा में लगा दिये । कारपोरेट घराने के भारी कर्जों की माफी के साथ उन्हे लम्बी चौड़ी रियायतें दी गयी । और आम जनता की सुविधाओं मे कटौती की गयी । आज देश के सकल घरेली उत्पाद में गिरावट के साथ कृषि की विकास दर सबसे निचले स्तर पर पहुॅच गयी है।
दिवंगत नेता का0 जयबहादुर सिंह के जीवन और कारनामों तथा पूर्वांचल के क्रांतिकारी आन्दोलन पर शोध करनें वाले वरिष्ठ इतिहासकार का0 ए0के0मिश्रा ने उन्हे श्रद्धांजली देते हुए कहा कि इतिहास में दर्ज 1938 पिपड़ीडीह ट्रेन डकैती काण्ड में दिवंगत का0 जयबहादुर सिंह और का0 झारखण्डेय राय, के बहादुरी भरे कारनामों से ब्रिटिश सरकार कॉप उठी थी । इस मुकदमें में का0 जयबहादुर सिंह को 8 साल का कारावास और 500 रू0 जुर्माना की सजा दी गयी । 1946 में रिहायी के बाद उनका पूरा जीवन जमीनदारी व्यवस्था के उन्मूलन तथा किसानों एवं मजदूरों को शोषण से मुक्त करनें के संघर्ष में व्यतीत हुआ । वे जनता के सच्चे मित्र थे
श्रद्धाजलि सभा में भाकपा नेता विनोद कुमार राय, का0 रामअवतार सिंह, का0 रामकुमार भारती, का0 हेसामुद्दीन, का0 रामनरायन सिंह, का0 सूर्यदेव पाण्डेय, का0 मुख्तार शर्मा, ई0 डी0एन0सिंह, किसान सभा के जिलाध्यक्ष देवेन्द्र मिश्र, पलिका परिषद के सदस्य का0 फकरे आलम पप्पू, श्रीमती अर्चना उपाध्याय, आदि नें भी अपने विचार व्यक्त किये और दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की । सलमान घोसवी नें एक क्रान्तिकारी गीत प्रस्तुत किया ।
श्रद्धांजली सभा के पूर्व शहीदे उर्दू जयबहादुर सिंह व स्वत्रंता संग्रामी सेनानी का0 झारखण्डेय राय की मूर्तियों पर मार्ल्यापण किया गया।

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