दस्तक अभियान : स्वास्थ्य विभाग दो साल तक के बच्चों को लगा रहा जेई का टीका

■ अब संचारी रोगों का जिले से होगा खात्मा

■ टीकाकरण से बच्चों में बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता

मऊ। संचारी रोगों को मात देने के लिए गांव-गांव स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर दस्तक दे रही हैं। यह टीमें टीबी के सक्रीय मरीज, डेंगू, फाइलेरिया, मलेरिया और जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) आदि से ग्रसित मरीजों की पहचान कर उनका उपचार करा रही हैं। 25 जुलाई तक चलने वाले अभियान में लोगों को स्वच्छता, पोषण युक्त भोजन आदि की महत्ता के प्रति जागरूक किया जा रहा है। नियमित टीकाकरण सत्रों में दो साल तक के बच्चों को जेई का टीका भी लगाया जा रहा है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ सतीशचन्द्र सिंह ने बताया कि टीकाकरण के कारण वैक्सीन से शरीर में मौजूद बैक्टीरिया और वायरस को पहचान कर उन्हें नष्ट करने के लिए एंटीबॉडीज बनाने का कार्य करती है। टीकाकरण के समय पर होने से गर्भवती और बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने से कई गंभीर रोगों से बचाव होता है। यह शरीर में उत्पन्न होने वाले सूक्ष्म जीवों को नष्ट करता है। रोगों से बीमारियों के बचाव के लिए ही जन्म के समय से ही नियमित टीकाकरण भी शुरू कर दिया जाता है। 
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ वीके यादव ने बताया कि जन्म से दो वर्ष तक की आयु तक टीकाकरण जेई बीमारी से लड़ने की क्षमता बढ़ाती है। जिले में जेई के टीके से 7584 बच्चों को अच्छादित किया जा चुका है। टीकाकरण के साथ-साथ बच्चों को पौष्टिक भोजन से उनका शारीरिक व मानसिक विकास होता है। इसलिये सभी को जागरूक होकर समयानुसार अपने बच्चों का टीकाकरण कराते रहना चाहिये। 
स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी (एचईओ) यूसुफ शाह ने बताया कि जिले में नियमित टीकाकरण कार्यक्रम जारी रहेगा जिसके लिये सभी सीएचसी/पीएचसी स्थलों पर पर्याप्त वैक्सीन उपलब्ध है।
जेई के लक्षण व पहचान…
जापानी एनसेफेलिटिस एक वायरल संक्रमण है जो मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करता है और फ्लेविवायरस से संक्रमित मच्छर के काटने से फैलता है। इसके कारण बुखार, सिरदर्द, भ्रम, दौरे, और कुछ मामलों में जन हानि भी होती है। यह संक्रमण सबसे अधिक बच्चों को प्रभावित करता है और गर्मी के दौरान अधिक सक्रिय रूप से फैलता है। 

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