खास-मेहमानचर्चा में

चाय की दुकान पर काम करता, एक अमीर बच्चा

■ बात कुछ देर पहले की

यह तस्वीर है जनपद फैजाबाद के मया बाजार स्थित ग्राम छतरा के बाबा स्वीट्स नामक दुकान पर काम करने वाले लगभग 09-10 वर्षीय बच्चे की है। आज लखनऊ से मऊ आते वक्त हम लोगों ने अपनी कार उक्त दुकान पर चाय पीने के लिए रोकी और जैसे ही दुकान पर प्रवेश किया तो देखा कि यह बच्चा, पालीथीन बंद होने के बाद प्रचलन में आये सफेद रंग के झोले को फाड़कर तुरन्त मास्क बनाया और अपने मुंह पर लगा लिया। मैंने उसकी हरकत को देख जैसे ही अपने मित्र श्री प्रकाश गुप्ता को उसकी तस्वीर को कैप्चर करने के लिए इशारा किया, तो वह मेरे इशारे को भांप गया और तुरंत अपने मुंह पर लगाया वह झोले का बना मास्क निकाल लिया। उसके बाद मैंने उससे कई बार कहा कि लगाओ तो उसने नहीं लगाया क्योंकि वह समझ चुका था कि मैं उसका फोटो खींचने वाला हूं।

थोड़ी देर बाद हम लोग चाय हाथ में लेकर दुकान से हटकर सड़क के किनारे खड़े होकर चाय पीने लगे। तब तक वह बच्चा पुनः मास्क लगा लिया। चाय पीते पीते मैंने उसकी एक तस्वीर तो आनन फानन में क्लिक कर ली, लेकिन जैसे ही दूसरी तस्वीर क्लिक करनी चाही, तो वह मास्क निकाल लिया। उसका नाम फिरोज था वह वहीं गांव का रहने वाला था।
वैसे तो मेरे फोटो खींचने के फैसले से फिरोज को कई बार दिक्कतें हुई और मैंने कहीं ना कहीं उसको दूसरे रूप में परेशान करने की कोशिश की। लेकिन उस बच्चे को कोरौना को लेकर जितनी भी जानकारी हुई होगी उसका कोरौना वायरस के प्रति सचेत होना व अपने बचाव के लिए जो प्रयास किया वह अविस्मरणीय है। उस बच्चे के प्रयास को जो मेरे आंखों ने देखी वह समाज को बताने के लिए काफी सुखद संदेश है कि एक चाय की दुकान पर काम करने वाला बच्चा जो बेहद गरीब है, मजबूर है, वह कोरौना वायरस के बारे में जागृत हो चुका है। लेकिन कुछ लोग आज भी सियासत कर रहे हैं। ऐसे में वह बच्चा निश्चित रूप से पढ़े लिखे उस इंसान से बेहतर हैं जो इस महामारी के प्रकोप को नहीं समझ रहे हैं। मैं ऐसे बच्चे को आर्थिक रूप से गरीब तो कह रहा हूं, लेकिन वास्तव में सामाजिक और राष्ट्रीय रूप में वह बच्चा कहीं न कहीं बहुत अमीर है ऐसे बच्चों को बार-बार मेरा सैल्यूट है।

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