कोई भूखा न सोए वतन में कभी, अन्नदाता कहते, धन्य हूं सम्मान पाकर
“कामनी गुप्ता“ दो बैलों की जोड़ी लेकर,चला मेहनत का सफ़र।किसान को फुर्सत कहां,जो सोच करे इधर उधर।इन खेत खलिहानों में
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“कामनी गुप्ता“ दो बैलों की जोड़ी लेकर,चला मेहनत का सफ़र।किसान को फुर्सत कहां,जो सोच करे इधर उधर।इन खेत खलिहानों में
Read More( कामनी गुप्ता ) कुछ कसक सी कहीं तो कभी रह ही जाती है,दिल सोचता कुछ है पर कहां इसकी
Read More( मधु ) मुझे आज ही पता चला कि आज का दिन “विश्व साड़ी दिवस” के रूप में मनाया जाता
Read Moreमेरी कलम से… आनन्द कुमार वह मुझे जगाकर सो गये,जाने दो, सोने दो,थक जाते हैं वो,दिन भर के उधेड़बुन में,लगे
Read Moreमेरी कलम से…आनन्द कुमार हां मैं मजदूरनी हूं,रोज ढोती हूँ बोझ,अपनी जिन्दगी की,कभी खांची से,कभी सिर पर, ईंट रख,इनकी उनकी,इमारत
Read More( आशा साहनी ) मुझे गर्व है मै नाविक हूँ अपने भूजबल से लहराता हूँ,हाथों में पतवार लिए मै अपनी
Read More( शब्द मसीहा केदारनाथ ) रेड लाइट होते ही उसकी तरफ आठ-नौ साल का एक बच्चा बढ़ा और उसमें अपना
Read Moreदेवकली देवलास: एक अद्भुत धार्मिक स्थल फेसबुक पेज पर शनिवार, दिनांक 10/10/2020 को कविता पाठ कार्यक्रम का आयोजन किया गया
Read More( उर्वी बरनवाल ) गम के सागर में , अडिग शिला हो तुम,मेरी माँ….बड़ी भोली हो तुममन्दिर में स्थित ,मूर्ति
Read Moreमेरी कलम से… आनन्द कुमार ……हुनर होती कहां सब में,जो पलट दे बाजी,एक दांव पे,हैं नेता ये,तराशते हैं ये,तलाशते है,कलाकारी
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