तू ही मेरा ताजमहल…
(शब्द मसीहा केदार नाथ की कहानी) “रत्तू! आज क्या है? तेरे को कुछ याद है?” पत्नी ने साइकिल पर पति
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(शब्द मसीहा केदार नाथ की कहानी) “रत्तू! आज क्या है? तेरे को कुछ याद है?” पत्नी ने साइकिल पर पति
Read Moreवैसे तो मैं ज्यादा लोगों से मिल नहीं पाता हूँ, मगर जब से सामने वाले फ्लोर पर एक बुजुर्ग महिला
Read More■ रोशनी जायसवाल बेटी थी वो,अपने मां कि,लाडली थी वो,अपने पिता की,गुड़िया थी वो,अपने चाहने वालों कि,परी थी वो,खुद के
Read Moreमेरी कलम से… आनन्द कुमार अरे ! चुप,कैसी हैवानियत की!बात करते हो,बेटी मरी है….उसे दलित, पिछड़ा, अगड़ा,से क्यों जोड़ते हो
Read Moreमेरी कलम से… आनन्द कुमार लकड़ियों का सेज सजा,उसपर कोई बेटी लेटी है,रात का है घना अंधेरा,खाकी की जबरदस्त ड्यूटी
Read Moreमेरी कलम से… आनन्द कुमार हैवान बना पुरूष,एक गुड़िया की, इज्जत के साथ,फिर तार-तार किया,पार किया मानवता की,सारे हदें। कानून
Read Moreशिक्षक दिवस विशेष… मधुलिका बरनवाल मैं लघु मूढ़ अणु स्वरूप सा,तुम महान हो देव सदृश सा,संसार लिप्त है अंधकार में,तुम्ही
Read More( आशा साहनी ) महानगर के महावीर तुमकब तक नजर चुराओगेएक दिन ऐसा आयेगातुम खुद ही बाहर आओगे संस्कार की
Read More( शब्द मसीहा केदारनाथ ) कॉलेज के कंपाउंड में बहुत सारे लड़के-लड़कियां बैठे हुए एक -दूसरे से बतियाने में मशगूल
Read More● जिनके इरादे मजबूत हों वह कभी अपने लक्ष्य से नहीं भटकते: तय्यब पालकी ● महिलाएं लक्ष्य को पाने के
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