आज का आत्म उद्गम कोरोना की विषम परिस्थिति से सबक लेने से संबंधित
(किशोर कुमार धनावत) “विपदा-व्यथा जब आती है,करती बहुत उपकार।रहना-सहना और जीवन जीना,सिखाती सरल व्यवहार।पड़ोसी से गले मिलो नहीं,पर बन जाओ
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(किशोर कुमार धनावत) “विपदा-व्यथा जब आती है,करती बहुत उपकार।रहना-सहना और जीवन जीना,सिखाती सरल व्यवहार।पड़ोसी से गले मिलो नहीं,पर बन जाओ
Read Moreकिशोर कुमार धनावत,रायपुर जब सिर पर पड़ती है धूप,तो होठ सुखने लगते हैं|जब निकलता है घर से,तो तलवे जलने लगते
Read Moreडॉ अर्चना प्रकाश लखनऊ भारत प्यारा देश हमारा ,दुनियां के न्यारों से न्यारा ।दिल्ली दिल है भारत का,केंद्र विदेशी आकर्षण
Read More( अलका जैन, इंदौर मध्यप्रदेश ) जा बेटा एक ईंट ले आ कहीं से। बड़ी जोर से मारा है पुलिस
Read More(अंजु गुप्ता ) मन के गहरे सागर में,न जाने कितने छुपे हैं राज़ !गर चाहो तुम, तो बतला दूँ मैंअहसासों
Read More( अमित राज, नालन्दा, बिहार ) हमारी कहानी, बहाओ न पानी,यही जिंदगानी, बहाओ न पानी। सिखाओ न दादी सिखाओ न
Read Moreइन्दु तोदी, धरान (नेपाल) नारी हो तुम नारी का सम्मान करो !पल पल मत उसका अपमान करो । तुम से
Read More( पायल विजय परदेशी ) एक बार तो बेटी बनकर देखोंएक बार तो बेटी बनकर देखो पुरुष साथियों!आँसू छलक जाएँगे।
Read More(शब्द मसीहा केदारनाथ) “अरे! सुनती हो ।” पति ने कमरे में से ज़ोर से पुकारा । “बहरी नहीं हुई हूँ
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