रचनाकार

“आज की स्थिति”

किशोर कुमार धनावत,
रायपुर


जब सिर पर पड़ती है धूप,
तो होठ सुखने लगते हैं|
जब निकलता है घर से,
तो तलवे जलने लगते हैं|
जब पहुंचता है नदी किनारे,
सूखकर हो गई चमकती रेत|
हरियाली कहीं दिखती नहीं,
पशु-पक्षी भी हो गये अचेत|
कहीं कोई हलचल नहीं है,
निढ़ाल-सा हो गया है गाँव|
कोई किसी को बतलाता नहीं,
कहाँ रखे अब वो अपना पांव|

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