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बसपा प्रत्याशी अतुल राय ने कहा जो शपथ पत्र में लिखा वही सही, हार के भय से डरे विपक्षी

■ सपा जिला अध्यक्ष धर्म प्रकाश  यादव ने भाजपा प्रत्याशी हरिनारायण पर लगाया मुकदमा छुपाने का आरोप

(आनन्द कुमार)

मऊ। घोसी संसदीय सीट पर प्रत्याशियों के आरोप-प्रत्यारोप पर चल रहे खेल में रोज एक नया मोड़ आता जा रहा है। नामांकन के बाद से ही समस्याओं एवं आरोपों से घिरे अतुल राय के खिलाफ विरोधी रोज नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं। ऐसे में 11 मई को जिला निर्वाचन अधिकारी एवं जिला अधिकारी द्वारा मिले नोटिस संख्या 532 के जवाब में रविवार को बसपा व गठबंधन के प्रत्याशी अतुल राय ने जवाब देते हुए एक-एक आरोप का जवाब दिया है और इसके साथ ही उन्होंने भाजपा के प्रत्याशी एवं सांसद हरिनारायण राजभर के नामांकन के समय दाखिल शपथ पत्र में झूठी बयानी करने का आरोप लगाते हुए उनके नामांकन पत्र की वैधता पर पुनः विचार करते हुए खारिज करने का मांग किया है। अब देखना होगा कि 19 मई को चुनाव के पहले आरोप और प्रत्यारोप के इस खेल में जनता किसको घोसी का सांसद बनाती है और नेता मतदान के पहले तक एक दूसरे से आगे निकलने के लिए आरोप-प्रत्यारोप में कौन-कौन से हथकंडे अपनाते हैं यह सिलसिला 19 मई तक चलेगा एवं 23 मई को परिणाम के बाद समाप्त होगा।
रविवार को बहुजन समाज पार्टी के घोसी संसदीय क्षेत्र के उम्मीदवार एवं गठबंधन दल के प्रत्याशी अतुल कुमार सिंह अतुल राय के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी के सांसद हरिनारायण राजभर द्वारा जिलाधिकारी को सौंपे गए आरोप पत्र के जवाब में रविवार को अतुल राय के प्रतिनिधि के रूप में समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष धर्म प्रकाश यादव ने आरोप पत्र के एक-एक विषय का जवाब दिया है एवं सपा जिलाध्यक्ष धर्म प्रकाश यादव ने भाजपा प्रत्याशी हरिनरायण राजभर के नामांकन पर सवाल उठाया है। श्री यादव ने 70 घोसी लोकसभा के पर्यवेक्षक एवं भारत निर्वाचन आयोग दिल्ली से भाजपा के सांसद व प्रत्याशी हरिनारायण राजभर पर आरोप लगाते हुए कहा है कि हरिनारायण राजभर खुद अपने शपथपत्र में अपने आपराधिक मामले को छुपाए हैं। उन्होंने हरिनारायण राजभर के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग करते हुए  उनके नामांकन को चुनौती दिया है।
भाजपा सांसद व प्रत्याशी हरि नारायण राजभर ने अतुल राय पर मुकदमे का छुपाने का आरोप लगाया था एवं जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी से लिखित शिकायत किया था। जिसको गंभीरता से लेते हुए जिला निर्वाचन अधिकारी ने बसपा प्रत्याशी अतुल राय व सपा जिलाध्यक्ष धर्म प्रकाश यादव के खिलाफ नोटिस जारी करते हुए 13 मई को लिखित जबाव मांगा था, एक दिन पहले ही बसपा प्रत्याशी ने अपने ऊपर लगे आरोपों का एक-एक व बिन्दुवार लिखित जबाब धर्म प्रकाश यादव के माध्यम से जिला निर्वाचन अधिकारी को सौंपा है। आरोप पत्र के जवाब में कहा है कि उन्होंने अपने शपथपत्र में 25 अप्रैल को नामांकन के समय उनके शपथ पत्र के खिलाफ जो भी आरोप लगाया जा रहा है वह सब गलत है उनके ऊपर जितने मामले हैं उन्होंने सिर्फ उतने ही मामलों को शपथ पत्र में दर्शाया है। हरिनारायण राजभर द्वारा 32 मामले दिखाया गया है जबकि संलग्न छाया प्रति समाचार पत्र में प्रयागराज विधि संवाददाता के सूचना एवं प्रकाशन में कुल 42 मामले दर्शाए गए हैं जो नोटिस के साथ संलग्न में हमारे खिलाफ भिन्नता है। अतुल कुमार सिंह उर्फ अतुल राय ने अपने जवाब में कहा है कि हमने ना कुछ छिपाया है अधूरा से अथवा जानबूझकर कोई भी अपराधिक मामले को सूचनाओं को ना तो छुपाया है ना छोड़ा है। नाम निर्देशन पत्र के साथ संलग्न शपथ पत्र प्रारूप 26 के कालम 5 में दर्शित 13 आपराधिक मुकदमे ही विभिन्न न्यायालयों में लंबित हैं इन 13 अपराधिक मामलों के अतिरिक्त नामांकन के दिन तक कोई भी अन्य आपराधिक मुकदमा किसी न्यायालय में लंबित अथवा विचाराधीन नहीं रहा है। जिन पर किसी विधि द्वारा स्थापित एजेंसी द्वारा संज्ञान लिया गया हो या मुझे कभी सूचित ही किया गया है।
श्री अतुल राय ने अपने जवाब में कहा है कि निर्देशन पत्र संलग्नक शपथ पत्र की समीक्षा अन्य प्रत्याशियों की उपस्थिति में नियत तिथि समय व स्थान पर की गई उस समय भाजपा के प्रत्याशी हरिनारायण राजभर ने कोई भी आपत्ति शपथ पत्र की जानकारी पूर्ण अथवा पूर्ण होने के संबंध में नहीं उठाई इस आधार पर श्रीमान द्वारा हम जवाब देहिंदा का नाम निर्देशन पत्र विधि अनुसार पाते हुए हमें विद्यमान प्रत्याशी घोषित किया गया था। हरिनारायण राजभर का आरोप स्वीकार योग्य नहीं है तथा उनका शिकायती पत्र दिनांक 11.05. 2019 तथा उक्त पर आधारित नोटिस पत्रांक संख्या 532 दिनांक 11 मई 2019 निरस्त किए जाने योग्य है। ताकि मेरे साथ में आए हो सके। बसपा नेता ने कहा विपक्षी मेरे जीत व अपने हार के डर भय खाए हुए हैं और जनता को तरह तरह से बरगला रहे हैं।
अब देखना होगा कि घोसी के चुनावी महासमर समर में एक दूसरे पर आरोप और प्रत्यारोप के खेल में कौन सा प्रत्याशी किस प्रत्याशी को कानूनी शिकंजे में फंसाने में कामयाब होता है या फेल होता है।

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