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शहरनामा : कलेक्टर नहीं कमाल हो साहब!

(अभिषेक सिंह नीरज)

■ साधना, सर्जना, संघर्ष,सद्भावना,शिल्प, साँझी-संस्कृति का प्रतिबिम्ब आजमगढ़ महोत्सव-2019

आजमगढ़ । महोत्सव की तैयारियां तो महीनों से थीं और नागरिक को खबर भी थी। उसी क्रम में आज विधिवत आधिकारिक घोषणा लोगो लांचिग,महोत्सव गान और कार्यक्रम की सम्पूर्ण रूप रेखा पर मीडिया के साथ संवाद और भोज सहित संपन्न हुआ।

पत्रकारों की एक टोली की पूँछ पकड़े नागरिक भी कलेक्टर के कैंप कार्यालय में प्रवेश करता है।

जिले के वरिष्ठ पत्रकारों के साथ कलेक्टर साहब ने जैसे ही लोगो से पर्दा हटाया तमसा की रवानी दिखी ,निजामाबाद कि ब्लैक पॉटरी की कहानी दिखी ,हरिहरपुर घराने का सितार भी दिखा, रेशमी नगरी मुबारकपुर की साड़ी संग में साँझी विरासत की निशानी दिखी।

नागरिक पिछले कई दिनों से यह जानने के फ़िराक में था कि ये कमाल का लोगो आखिर बनाया किसने? सुन के हैरानी होती है कोई कलेक्टर तय करता है कि लोगो में क्या-क्या दिखना चाहिए और जब यह चाह पूरी नहीं होती है तो खुदी रच डालता हो खाटी आजमगढ़ की तश्वीर तो लिखना पड़ता है कलेक्टर नहीं कमाल हो साहब!

“गुत्थी गुत्थम…दे घुमा के
अड़चन खड़चन…दे दे घुमा के
जियो खिलाड़ी वाहे वाहे”
कुछ याद आया वर्ल्ड कप का थीम सॉग लिखने वाले आजमगढ़ की माटी के लाल मनोज यादव को मुम्बई से बुलाया जाता है। मनोज पूछते हैं साहब सांग में चाहिए क्या आप ये बता दो और कलेक्टर साहब डेढ़ पन्ने का चिट्ठा पकड़ा देते हैं और कहते हैं बस यह चाहिए और मनोज आधे घंटे में जोड़ तोड़ करके गद्य को पद्य के रूप में डाल के साहब को दिखा देते हैं और निकल जाते हैं फिर से माया नगरी मुम्बई और एआर रहमान की म्यूजिकल टीम के साथ सान्ग रिलीज़ हो जाता है ।जिसमें सम्पूर्ण भारत के साज छनकते हैं और पूरा आजमगढ़ झलकता है।जब आजमगढ़ के लोगों से बेहतर आजमगढ़ को कोई कलेक्टर समझ जाएं तो लिखना पड़ता है कमाल हो साहब।

नेता नगरी बेशक महोत्सव में आएगी पर उद्घाटन आम नागरिक ही करेगा। पर्यावरण संरक्षण पे केवल भाषण बाजी नहीं बल्कि महोत्सव में उसे जिया जायेगा।
गला किसी का भी इतना महत्वपूर्ण नहीं होगा जिसके लिए फूल तोड़े जायेगे या बुके का उपहार दिया जाएगा।
झालरों का चमचमाता शहर नहीं बल्कि महोत्सव में गांव बसाया जाएगा चकाचौध भारी रोशनी नहीं ढेबरी और लालटेन का मद्धिम उजाला होगा।वेस्ट मेटेरियल से पूरा प्रांगड़ सजेगा बेफिजूल खर्चा नहीं होगा। प्रायोजक जो बनना चाहें ओ बन जाएं मंच के सम्मान से लेकर विज्ञापन और पूरे परिवार को उचित स्थान और सम्मान दिया जाएगा।जब इस तरह की योजना पे कोई काम करे तो लिखना पड़ता है कमाल हो साहब!

लोक को लोक संस्कृति से जोड़ा जाएगा मूल थाती जो है हमारे लोक की उसी को बचाने पे विमर्श और आगे काम होगा। गीत वही होंगे जो बेशक गुदगुदाएंगे लेकिन इंद्रियों को उत्तेजित करने और भगदड़ मचाने वाले लोग या तो आएंगे ही नहीं या आ भी गये तो कायदे में रहेंगे।

कजरी ,सोहर ,फाग ,नकटा ,कहरौवा, धुबियहुवा जैसे लोक विधाओं के कलाकार अब विलुप्त की श्रेणी को प्राप्त हो रहे हैं क्योंकि जब इन विधाओं के महारथियों की मांग कलेक्टर साहब ने सूबे की सरकार से की तो दिन में दिया लेकर सरकार ढूढ रही है तब भी लोग नहीं मिल रहे हैं।आजमगढ़ से उठी यह आवाज अब पूरे प्रदेश में सुनाई देगी अब सरकार इन विधाओं को बचाने की मुहिम शुरू करेगी यह सुन कर नागरिक को कमाल हो साहब लिखना ही पड़ेगा।

महोत्सव जिले मुख्यालय पर पहुंचेगा उससे पहले तहसीलों की प्रतिभाओं को मंच और सम्मान देते हुये।
इस बार का महोत्सव जिले तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि गांव देहात तक पहुंचेगा। अंत में कलेक्टर साहब ने कहा बस देखिये नहीं हिस्सा बनिये जो कमियां है समय रहते बताइये आप सब के साथ और आशीर्वाद से ही यह महोत्सव सफल होगा।

परिपाटी रही है पत्रकारों को डायरी और पेन देनी की लेकिन अब दौर डिजिटल का है इसके मद्देनजर एक छोटा सा उपहार पेनड्राइव सभी को भेंट की गईं जो महोत्सव से एक जुड़ाव की निशानी बने। पेनड्राईब बाटी जा रही थी तभी किसी ने कहा पत्रकारों को पहचान के दीजिये तभी नागरिक को याद आया हम तो पूँछ पकड़ के आये थे पत्रकार थोड़ी हैं ,फर्जी पत्रकार बनने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाये इस डर से की बाटने वाला कहीं पहचान जाएगा पोल खुलने की आशंका से नागरिक सहम जाता है और पेनड्राइव के मोहपाश से खुद को विरक्त करता है और सोचता है पत्रकार है कौन और कितना बड़ा कोई कैसे पहचानेगा हा हा हा।

ख़ैर नागरिक को बस इतना कहना है कलेक्टर साहब ने कायदे की बात कही है आजमगढ़ के लिए ऐतिहासिक आयोजन है ढंग से लिखना पढना बात दिल्ली तक जाएगी और उनके मुँह पे करारा तमाचा होगा जो आतंक की नर्सरी कहते और समझते हैं इस ऐतिहासिक धरा को।

अभी के लिए ज़िंदाबाद
जल्द ही मिलेंगे…..

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